मध्यप्रदेश में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस और भाजपा ने प्रदेश की 230 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। आगामी 17 नवबंर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। चुनाव से पहले अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' प्रदेशभर के मतदाताओं का मन टटोलने निकला है। आज हमारा कारवां नरसिंहपुर पहुंचा है, जहां सुबह के वक्त आम मतदाताओं से अमर उजाला ने चर्चा की और उनके मुद्दों को जानने की कोशिश की। अमर उजाला के मंच पर लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी।
अमर उजाला से चर्चा में चौधरी जोगेंद्र सिंह कहते हैं कि नरसिंहपुर कृषि प्रधान जिला है। लेकिन कृषि के क्षेत्र में यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ है। नौजवानों के रोजगार के लिए भी कोई खास साधन नहीं हैं। नरसिंहपुर अब भी एक ग्रामीण क्षेत्र है। नेता सिर्फ आश्वासन देते हैं। दलपत सिंह कुशवाहा कहते हैं कि नरसिंहपुर मेरी जन्मभूमि है। यहां लोग अब बदलाव चाहते हैं। नरसिंहपुर वासियों का कहना है कि 20 साल से यहां कुछ नहीं हुआ। दीपक कुमार कहते हैं कि भाजपा सरकार ने काम तो किया है, लेकिन जो होना चाहिए वो काम नहीं हुए हैं।
राजेंद्र नेमा कहते हैं कि शिक्षा के लिए बेहतर स्कूल नहीं हैं, रोजगार के साधन नहीं हैं। भाजपा सरकार ने फ्री वाली योजनाएं तो चला दी हैं, लेकिन इसका असर ये हुआ है कि काम करने वाले लोग भी काम करने से कतरा रहे हैं। अभय तिवारी कहते हैं कि कांग्रेस ने भी कर्नाटक में एमपी जैसी योजनाएं चला दी हैं, इसलिए भाजपा को एमपी में फ्री बांटने वाली योजनाओं के लिए दोष नहीं दिया जा सकता।