मध्य प्रदेश का वल्लभ भवन (भोपाल)
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मध्य प्रदेश के सिवनी में दो आदिवासियों की मौत के 10 दिन बाद सरकार ने तीन सदस्सीय जांच दल गठित किया है। जांच दल घटना के कारणों और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई का आकलन कर रिपोर्ट सरकार को देंगा।
सरकार की तरफ से गठित जांच दल में एसीएस गृह विभाग राजेश राजौरा, सीआईएसएफ के एडीजी अखेतो सेता और माशिमं के सचिव श्रीकांत भनोत शामिल है। जांच दल अपनी रिपोर्ट के अलावा मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को रोकने के उपायों को लेकर सुझाव भी देंगा।
बता दें सिवनी की घटना पर राजनीति भी गरमा गई है। इसमें कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां पीड़ित परिवार से मिलने के लिए जांच दल भेज चुके है। कांग्रेस की तरफ से नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह जांच दल में शामिल थे। जिन्होंने बजरंग दल पर आदिवासी परिवार को घर में घुसकर पीटकर हत्या करने का आरोप लगाया था।
वहीं, बीजेपी की तरफ से भेजे जांच दल में आदिवासी वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले पदाधिकारी थे। इस दल ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे।
बता दें 2 मई को सिवनी के कुरई के सिमरिया में तीन आदिवासियों को गोकसी का आरोप लगाकर पीटा गया। इसमें एक आदिवासी गंभीर रूप से घायल और दो की मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में 9 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, सरकार ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी। आदिवासी वर्ग से जुड़ा मामले पर सियासत भी गरमा गई है।