मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ देवी सिंह धुर्वे
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मध्यप्रदेश जनपद पंचायत के चुनाव में आयाराम-गयाराम की स्थिति बन गई है। सुबह कोई किसी पार्टी में होता है और शाम को किसी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले और गढ़ माने जाने वाले नसरुल्लागंज में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। पूर्व जनपद अध्यक्ष देवी सिंह धुर्वे ने दोपहर को कांग्रेस की सदस्यता ली। देर शाम को वे भाजपा में लौट आए।
इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दांव कहा जा रहा है। दर्सल, नसरुल्लागंज में धुर्वे जनपद अध्यक्ष नहीं बन सके। इससे वे भाजपा से नाराज हो गए। इसी की वजह से उन्होंने दोपहर को कांग्रेस की सदस्यता लेने की घोषणा कर दी। जब यह बात भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंची तो वे सक्रिय हुए। उन्होंने समझाइश दी और धुर्वे शाम को भाजपा में लौट आए।
कांग्रेस बता रही थी अपनी जीत
देवी सिंह धुर्वे के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी के नेता इसे शिवराज सिंह चौहान को झटका कहकर प्रचारित कर रहे थे। खैर, भाजपा के नेता सक्रिय हुए तो शाम को देवी सिंह धुर्वे को मुख्यमंत्री निवास बुलाया गया। शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के बाद धुर्वे ने साफ कह दिया कि कांग्रेस जाने की बात निराधार है। उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली है। इस तरह शिवराज ने कांग्रेस को उसके ही खेल में उसे मात दे दी।
धुर्वे ने जारी किया बयान
यह घटनाक्रम होने के बाद धुर्वे ने एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि वह सुबह घर से निकल रहे थे। इस दौरान कुछ परिचितों के साथ चाय पीने को रुक गए थे। कुछ लोगों ने उसका वीडियो बनाया और वायरल कर दिया। इसके साथ ही दावा किया गया कि मैंने कांग्रेस की सदस्यता ले ली है। ऐसा कतई नहीं है। मैं भाजपा के साथ था और रहूंगा। मैं भाजपा का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं और भाजपा में ही हूं। मैंने पार्टी नहीं छोड़ी है।