तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में सोमवार रात ब्रह्मपुरी क्षेत्र स्थित राठौर धर्मशाला के नीचे की पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा खिसककर ममलेश्वर मार्ग पर बनी दुकानों पर गिरने की घटना के बाद मंगलवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। प्रशासन ने जर्जर राठौर धर्मशाला के आधे हिस्से को पोकलेन मशीन की मदद से ध्वस्त करना शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान नगर परिषद, राजस्व, पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
लगातार हो रही बारिश के कारण धर्मशाला के नीचे की पहाड़ी का मलबा अचानक खिसक गया, जिससे नीचे स्थित कई दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा। घटना रात में हुई, इसलिए सभी दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर घर जा चुके थे। यदि यह हादसा दिन में होता, तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
प्रशासन की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि धर्मशाला जिस स्थान पर बनी थी, उसके नीचे वर्षों पुराना मलबा और कमजोर ढलान मौजूद था। लगातार बारिश के कारण जमीन की पकड़ कमजोर पड़ गई और मलबा सड़क की ओर खिसक गया। इससे धर्मशाला की संरचना भी असुरक्षित हो गई थी और उसके कभी भी ढहने की आशंका बनी हुई थी।
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नगर परिषद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी मोनिका पारधी ने बताया कि नगर क्षेत्र में स्थित जर्जर भवनों और पुरानी धर्मशालाओं को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। राठौर धर्मशाला के नीचे से मलबा खिसकने के बाद स्पष्ट हो गया था कि भवन श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के लिए खतरा बन चुका है। इसी कारण सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए धर्मशाला के असुरक्षित हिस्से को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
उन्होंने बताया कि नगर परिषद ने सभी जर्जर भवनों, धर्मशालाओं और अन्य खतरनाक संरचनाओं के संचालकों एवं मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं आवश्यक कार्रवाई कर भवनों को सुरक्षित करें या उन्हें हटाएं। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
ओंकारेश्वर में इन दिनों सावन मास और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां चल रही हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहता। इसी उद्देश्य से संभावित हादसों को रोकने के लिए जर्जर भवनों के विरुद्ध अभियान तेज कर दिया गया है।
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए मांग की है कि नगर के सभी पुराने और खतरनाक भवनों का तकनीकी सर्वे कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।