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MP News: मकर संक्रांति से पहले समझा 15 करोड़ किमी दूर स्थित सूर्य का महत्व, सूर्य से संसार कार्यक्रम में जुटे लोग

Thu, 13 Jan 2022 04:10 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

14 जनवरी को देशभर में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। कहा जाता है कि इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। इसके पीछे के तथ्यों और सूर्य के महत्व को समझाने के लिए गुरुवार को सूर्य से संसार नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
 
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सूर्य से संसार कार्यक्रम में लोगों ने सूर्य के महत्व को जाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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14 जनवरी को देशभर में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। कहा जाता है कि इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। इसके पीछे के तथ्यों और सूर्य के महत्व को समझाने के लिए गुरुवार को सूर्य से संसार नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने सूर्य से संसार नामक कायर्क्रम में सूर्य का वैज्ञानिक महत्व बताया। उन्होंने बताया कि पृथ्वी से दिन में दिखने वाला तारे सूर्य को पूरे देश में 14 जनवरी और कल अलग-अलग नामों के पर्व में पूजा जा रहा है। देश के पश्चिम एवं मध्यभाग में मकर संक्रांति, दक्षिण में पोंगल तो पूर्व में बिहु नाम के पर्व में पृथ्वी पर जीवन देने वाले सूरज की आराधना की जा रही है। लोगों में सूर्य को लेकर कई तरह की जिज्ञासा रहती है, इसी के मद्देनजर सूर्य से संसार कार्यक्रम किया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।



सारिका ने बताया कि सूर्य एक तारा है, जिसका प्रभाव केवल सौरमंडल के आठवें ग्रह नेप्च्यून तक ही नहीं बल्कि इसके बहुत आगे तक फैला हुआ है। सूर्य की तीव्र ऊर्जा और गर्मी के बिना पृथ्वी पर जीवन नहीं होता। सूर्य हाइडोजन एवं हीलियम गैस का बना हुआ है। इसकी आयु लगभग साढ़े चार अरब वर्ष है। अगर सूर्य कोई खोखली गेंद होता तो उसे भरने में लगभग 13 लाख पृथ्वी की आवश्यकता होती। हमारी पृथ्वी इससे लगभग 15 करोड़ किमी दूर स्थित है। सूर्य का सबसे गर्म हिस्सा इसका कोर है जहां तापमान 150 करोड़ डिग्री सेल्सियस से ऊपर है। नासा द्वारा 24 घंटे सूर्य के वातावरण से इसकी सतह एवं अंदर के हिस्से का अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए अंतरिक्षयान सोलर प्रोब, पार्कर, सोलर आबिर्टर एवं अन्य यान शामिल हैं।
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उन्होंने बताया कि मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है, लेकिन वास्तव में अब ऐसा नहीं होता है। हजारों वर्ष पहले सूर्य मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण हुआ करता था। इसलिये यह बात अब तक प्रचलित है। वैज्ञानिक रूप से सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती पृथ्वी के झुकाव के कारण पृथ्वी से देखने पर 21 दिसंबर के दिन सूर्य मकर रेखा पर था। उस दिन उत्तरी गोलार्द्ध में रात सबसे लंबी थी। 22 दिसंबर से दिन की अवधि बढ़ने लगी है और तब से ही सूर्य उत्तरायण हो चुका है। कार्यक्रम में लोगों ने सूर्य से संबंधित कई सवाल भी पूछे, जिनके उत्तर कार्यक्रम में मिले।
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