इंडियन स्पेश रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) द्वारा लांच देश के सबसे छोटे सैटेलाइट रॉकेट एसएसएलवी डी-1/ईओएस-02 की प्रोग्रामिंग में भोपाल की 15 छात्राओं ने अपना योगदान दिया है। यह क्षण बेटियों को जीवनभर यादगार रहेगा।
भेल के बरखेड़ा स्थित महारानी लक्ष्मी बाई गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल की 10वीं और 12वीं की यह छात्राएं है। इन छात्राओं का चयन इसी वर्ष स्पेश इंडिया द्वारा किया गया था। सभी छात्राओं को चिप कोडिंग की बारीकियों को समझाने और पारंगत बनाने के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया था। रविवार को इसरो के हरिकोटा सेंटर से इस आजाद सेटेलाइट के प्रक्षेपण प्रक्रिया से भी ये बेटियां भोपाल से ही ऑनलाइन जुड़ी और वे इस महान क्षण की सौभाग्यशाली साक्षी बनी। बता दें आजादी के अमृत महोत्सव के तहत भारत सरकार द्वारा इस सेटेलाइट को छोड़ने के कार्यक्रम के तहत देश भर के स्कूली की 750 छात्राओं का चयन किया गया था।
स्कूल के शिक्षक जितेंद्र चौहान ने बताया कि पिछले सत्र मार्च में स्पेस किड्स इंडिया की ओर से संदेश आया कि 15 बच्चों के साथ एक आजादी सेटेलाइट के लिए एक उपकरण की प्रोग्रामिंग करनी है । चेन्नई से ऑनलाईन प्रशिक्षण हुआ, चैन्नई से एक आर्डिनो पेडोल उपकरण स्कूल भेजा गया, इस उपकरण को सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्कूल में तैयार किया गया। जिसे आजादी सेटेलाइट के लिए चेन्नई भेजा गया । प्रोग्रामिंग हेतु ऑनलाइन मार्गदर्शन चैन्नई से मिला।उन्होंने बताया कि पूरे देश से 75 स्कूलों से 750 छात्राओ ने मिलकर इस सेटेलाइट को तैयार किया ।
इन सभी बेटियों और उनके शिक्षक जितेन्द्र पाल सिंह चौहान ने भारत सरकार के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि आजादी के अमृत महोत्सव में उनके लिए यह पल पूरी जिंदगी यादगार रहेगा।उन्होंने कहा है कि उन्हें देश को आगे ले जाने की प्ररेणा भी मिली है।
आजादी सेटेलाइट में कक्षा 12वीं से नैन्सी पटेरिया, निहारिका खरे, शाहिस्ता, और प्रियंका विश्वकर्मा तथा कक्षा 10वीं से प्रिया चौरे, शिवांगी वाजपेयी, आयुशी उमरे, सेजल कुशवाह,स्नेहा यादव, प्राची सूर्यवंशी, बिपाशा गुप्ता, पूर्वी सेन, चंचल सूर्यवंशी, अमृता यादव और गरिमा सरोवर शामिल है। खास बात यह है कि यह सभी साधारण परिवार की बच्चियां है। इन बच्चियों के पिता पेट्रोल पंप कर्मचारी, ड्राइवर, मैकेनिक, किसान, मिल्क पार्लर, मजदूरी का काम करते है।