फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऑनलाइन गेमिंग घोटाला: जिनके खाते में पहुंची राशि, उन्हें आरोपी नहीं बनाया; पुलिस जांच पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल

Mon, 17 Aug 2026 08:44 PM IST
कटनी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कटनी के 11.94 करोड़ रुपये के ऑनलाइन गेमिंग घोटाले की जांच पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि वित्तीय लेन-देन के स्पष्ट प्रमाण होने के बावजूद मुख्य लाभार्थियों और साजिशकर्ताओं को आरोपी नहीं बनाया गया। कोर्ट ने पुलिस की निष्पक्षता और जांच प्रक्रिया पर गंभीर नाराजगी जताई।
विज्ञापन
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कटनी जिले में उजागर हुए 11.94 करोड़ रुपये के ऑनलाइन गेमिंग फर्जीवाड़े की जांच प्रक्रिया पर अत्यंत गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उच्च न्यायालय ने मामले में 11.94 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन के स्पष्ट प्रमाण मिलने के बावजूद मुख्य संदिग्धों को जांच के दायरे से बाहर रखने पर कटनी पुलिस की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने मामले की स्थिति रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली तथा निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
विज्ञापन


फर्जीवाड़े में वित्तीय साक्ष्य
पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर धोखाधड़ी करने वाली आपराधिक संस्थाओं के विरुद्ध मामला दर्ज किया था। वित्तीय जांच अधिकारी की रिपोर्ट दर्शाती है कि संदिग्ध बैंक खातों से कुल 11.94 करोड़ रुपये की अवैध राशि का लेनदेन हुआ। बैंक रिकॉर्ड और फोरेंसिक ऑडिट की जांच से स्पष्ट हुआ कि यह धन अनेक मुखौटा कंपनियों तथा फर्जी बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया था। इसके बावजूद जांच दल ने इस वित्तीय लेन-देन के मुख्य लाभार्थियों और आयोजकों के विरुद्ध कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया।

ये भी पढ़ें- हैवानियत की हद पार: पांच लोगों ने की किशोर की हत्या, एक करोड़ 20 लाख में प्राइवेट पार्ट बेचने की रची साजिश
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिस कार्रवाई की विफलता
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, पुलिस ने जांच को केवल छोटे एजेंटों और बैंक खाता धारकों तक ही सीमित रखा। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 11.94 करोड़ रुपये की  राशि जिन मुख्य प्रभावशाली व्यक्तियों के खातों में पहुंची, पुलिस ने उन्हें न तो पूछताछ के लिए बुलाया और न ही मामले में आरोपी बनाया। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, जांच अधिकारी वित्तीय साक्ष्य उपलब्ध होने के बाद भी मुख्य साजिशकर्ताओं को संरक्षण देने का प्रयास कर रहे हैं, जो न्याय प्रक्रिया के सिद्धांतों के विपरीत है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें