मप्र में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में कराने का संकल्प...
गेहूं के उत्पादन में पंजाब को पीछे छोड़ दिया। पहले शिक्षा कर्मी हुआ करते थे, अब सीएम राइज स्कूल बन रहे। कभी पांच मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे, अब 24 मेडिकल कॉलेज हो गए हैं। मप्र ऐसा राज्य बना, जिसने हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में कराने का संकल्प लिया। अंग्रेजी प्रतिभा को नहीं मार पाएगी।
जन्मदिन, एनिवर्सिरी पर लगाए पौधे...
मप्र में जिनके माता-पिता नहीं हैं वो बच्चे अनाथ नहीं रहेंगे। उनके भरण पोषण पढ़ाई की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी। सीएम ने जनता से की मांग बोले में रोज तीन पेड़ लगता हूं, आप लोग जन्मदिन, एनिवर्सरी पर भी पौधे लगाएं, पति पत्नी के सम्बंध अच्छे बने रहेंगे। सीएम ने कहा, बिजली पर 24 हजार करोड़ सब्सिडी देते हैं। मेरी अपील है कि हम फालतू बिजली नहीं जलाएंगे। हम ऊर्जा बचाएंगे। पीने के पानी का दुरुपयोग नहीं करेंगे।
सभी जिलों में हो रहे कार्यक्रम...
एक नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए मध्यप्रदेश राज्य 66 साल पूरे कर 67वें साल में प्रवेश कर रहा है। भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम हो रहा है। बाकी जिलों में भी स्थापना दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके लिए कलेक्टरों को एक-एक लाख रुपये की राशि कलेक्टरों को दी गई थी।
शिव महिमा" नृत्य नाटिका की ओजमयी प्रस्तुति
नई दिल्ली की सुप्रतिष्ठित कोरियोग्राफर सुश्री मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 400 कलाकारों द्वारा "शिव महिमा" नृत्य नाटिका की ओजमयी प्रस्तुति दी। सती प्रसंग, पार्वती जन्म, शिव तांडव, शिव बारात, शिव पार्वती विवाह, महाकाल लोक, भगवान शिव और मां सती के विभिन्न रूपों को को नृत्य, संगीत एवं 3डी तकनीकी से सजीव बना दिया। शून्य से शिव, शिव से कालातीत महाकाल की कथा को सुन सभी दर्शक शिव की महिमा में मंत्रमुग्ध हो गए।
शंकर-एहसान-लॉय बैंड के संगीत में झूमा मध्यप्रदेश
देश के सुविख्यात शंकर-एहसान-लॉय बैंड ने गीत संगीत की मनमोहक प्रस्तुति दी। शंकर महादेवन ने गणेश स्तुति से संगीतमयी शाम की शुरुआत की। संगीत की त्रिवेणी ने शिव तांडव स्त्रोत, दिल चाहता है, हा यही रास्ता है तेरा, मैने जिसे अभी अभी देखा है आदि गीतों से दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और बकअप से संगीतकारों की हर प्रस्तुति का अभिवादन किया।
संगीतकारों की तिकड़ी शंकर महादेवन, एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा से मिल कर बनी है और कई भारतीय फिल्मों के लिए संगीत प्रदान करती है। उन्होंने कई फिल्मों में संगीत दिया एवं गायन कार्य किया है। जैसे मिशन कश्मीर (2000), दिल चाहता है (2001), कल हो ना हो (2003), बंटी और बबली (2005), कभी अलविदा ना कहना (2006), डॉन- द चेस बिगिन्स अगेन (2006), तारे जमीं पर (2007), रॉक ऑन (2008), वेक अप सिड (2009), माय नेम इस खान (2010), कार्तिक कॉलिंग कार्तिक (2010), हाउसफुल (2010) और सूरमा (2018)।