सोशल इंजीनियरिंग के चलते मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों ही बड़े दल कांग्रेस और भाजपा के लिए हार का कारण बनती रही हैं। हालांकि, इनके द्वारा वोट काटने से सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होता आया है। इसीलिए गृहमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने सपा-बसपा प्रत्याशियों को दाना-पानी देने का मंत्र अपने नेताओं को दिया है।
बता दें, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की कमान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ले रखी है। शाह प्रदेश की चुनावी रणनीति को जमीन पर उतार रहे हैं। हाल ही में शाह मध्य प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर थे। उन्होंने ग्वालियर में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक ली और उन्हें सपा और बसपा प्रत्याशियों को मजबूत करने की बात कही।
सपा-बसपा का 50-60 सीटों पर प्रभाव
दरअसल, पिछले पांच चुनाव को आंकड़ें देखें तो बसपा और सपा का 50 से 60 सीटों पर प्रभाव रहा है। ये सीटें भले ही ये दल हर बार जीत ना पाए, लेकिन जातिगत समीकरणों से दोनों पार्टी ने भाजपा और कांग्रेस का गणित बिगाड़ा है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होता आया है। इन दोनों ही पार्टी का प्रभाव ग्वालियर-चंबल, विंध्य और बुंदेलखंड में ज्यादा रहा है। 2018 के चुनाव में बसपा ने भिंड और पथरिया सीट पर जीत हासिल की थी। साथ ही चार सीटों पर वह दूसरे स्थान पर थी। वहीं, इस साल सपा ने एक सीट सागर संभाग के छतरपुर जिले की बिजावर विधानसभा सीट से जीती थी और पांच सीटों पर वह दूसरे स्थान और चार सीटों पर वह तीसरे स्थान पर थी। इनमें से अधिकतर सीटों पर बसपा और कांग्रेस में दलित वोट बंटने से भाजपा को जीत मिली थी। इनमें से ज्यादातर सीटों पर बहुत कम अंतर से हार जीत हुई थी।
यह है सियासी गणित
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में 2018 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 35 सीटों में से भाजपा ने 18 और कांग्रेस 17 सीटें जीती थी। जानकारों का कहना है कि भाजपा की रणनीति दलित वोट बैंक को बसपा से छिंटकने पर कांग्रेस की तरफ जाने से रोकना है। पिछले बार बसपा का वोट प्रतिशत 5.01% आ गया था, जबकि कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ा था। इससे कांग्रेस की सीट भी बढ़ी थी।
इन सीटों पर बसपा प्रत्याशी थे दूसरे नंबर
ग्वालियर ग्रामीण सीट पर भाजपा के भारत सिंह कुशवाह 1 हजार 517 वोट से जीते थे। यहां पर बसपा के साहब सिंह गुर्जर 49 हजार वोट लेकर दूसरे और कांग्रेस प्रत्याशी मदन कुशवाह 38 हजार 199 वोट लेकर तीसरे स्थान पर थे।
पोहरी सीट पर भाजपा के सुरेश धाकड़ 22 हजार 496 वोटों से जीते थे। यहां पर बसपा प्रत्याशी कैलाश कुशवाह 43 हजार 848 वोट लेकर दूसरे स्थान पर थे। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी हरि वल्लभ शुक्ला 42 हजार 638 वोट के साथ तीसरे स्थान पर थे।
सतना जिले की रामपुर बघेलान सीट पर भाजपा प्रत्याशी 15 हजार 687 वोट से जीते थे। यहां पर बसपा प्रत्याशी रामलखन सिंह 53 हजार 129 वोट के साथ दूसरे नंबर पर थे। वहीं, कांग्रेस के रामशंकर प्यासी 42 हजार वोट से साथ तीसरे नंबर पर थे।
देवतालाब सीट पर भाजपा के गिरीश गौतम 1080 वोट से जीते थे। यहां पर बसपा प्रत्याशी सीमा जयवीर सिंह सेंगर 43 हजार 963 वोट के साथ दूसरे स्थान पर थे। कांग्रेस प्रत्याशी विद्यापति पटेल 30 हजार वोट लेकर तीसरे स्थान पर थे।
यहां पर सपा प्रत्याशी ने बिगाड़े खेल
निवाड़ी सीट पर भाजपा प्रत्याशी अनिल जैन 8 हजार 837 वोट से जीते थे। यहां पर समाजवादी पार्टी की मीरा दीपक यादव 40901 वोट लेकर दूसरे स्थान पर थीं।
रीवा जिले की गुढ़ सीट पर भाजपा के नागेंद्र सिंह 7 हजार 828 वोट से जीते थे। यहां पर सपा के कपिध्वज सिंह 34 हजार 741 वोट के साथ दूसरे नंबर पर थे।
बालाघाट की परसवाड़ा सीट पर भाजपा के रामकिशोर 9 हजार वोट से जीते थे। यहां पर सपा के कंकर मुंजारे 47 हजार 787 वोट के साथ दूसरे स्थान पर थे। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे मधुकुमार 47 हजार 400 वोट लेकर तीसरे स्थान पर थे।
बालाघाट सीट पर गौरीशंकर बिसेन 27 हजार वोट से जीते थे। यहां पर सपा से अनुभा मुंजारे 45 हजार 822 वोट लेकर दूसरे स्थान पर थीं।
टीकमगढ़ जिले की पृथ्वीपुर सीट पर बसपा के शिशुपाल यादव 44,816 वोट लेकर दूसरे स्थान पर थे। हालांकि, बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और उपचुनाव में जीत गए।