बालाघाट में अज्ञात बीमारी का कहर
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मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले की अडोरी और मछुरदा पंचायत के बैगा बहुल आदिवासी इलाकों में अज्ञात बीमारी से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय प्रियंका धुर्वे की इलाज के दौरान मौत हो गई। उसे 9 अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 11 अगस्त की रात इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही क्षेत्र में इस बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों की संख्या आठ हो गई है। सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन के मुताबिक, बच्ची कई बीमारियों से ग्रसित थी।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों की लगातार हो रही मौतों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। दिग्विजय सिंह ने मृत बच्चों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग भी की है। उन्होंने गंभीर रूप से बीमार बच्चों को एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर और भोपाल के बड़े अस्पतालों में सरकारी खर्च पर इलाज कराने की मांग रखी है।
आठ बच्चों की हो चुकी है मौत
अंचल में बीमारी से अब तक लमनिन धुर्वे, साहिल धुर्वे, पूजा धुर्वे, सचिन मरकाम, प्रीति मरकाम, अरविंद धुर्वे, मंगली मरकाम और प्रियंका धुर्वे की मौत हो चुकी है। लगातार बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में भी चिंता बढ़ गई है।
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बच्चों में मिले कई तरह के लक्षण
जबलपुर मेडिकल कॉलेज और स्थानीय डॉक्टरों की टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुकी है। जांच के दौरान बच्चों में निमोनिया, खून की कमी, डिहाइड्रेशन, किडनी प्रभावित होने, बुखार, खुजली और मलेरिया जैसे लक्षण पाए गए हैं। बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच के नमूने पुणे स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग को अभी जांच रिपोर्ट का इंतजार है और रिपोर्ट मिलने की समय सीमा स्पष्ट नहीं की गई है।