मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव में ग्वालियर-चंबल अंचल में कांग्रेस ने इतिहास बदलकर रख दिया है। पहले सिंधिया अपना गढ़ ग्वालियर हारे और अब केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर को मुरैना की जनता ने तगड़ा झटका दिया है। तोमर का गढ़ कहे जाने वाले मुरैना में नगर निगम महापौर की कुर्सी पर अब कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है।
कांग्रेस की महापौर प्रत्याशी शारदा सोलंकी ने 14 हजार 600 वोटों से जीत हासिल कर ली है। मुरैना नगर निगम सीट पर भी जीतने का ट्रेंड ग्वालियर जैसा ही है। यहां भी कांग्रेस प्रत्याशी ने हर राउंड में बीजेपी पर बढ़त बनाए रखी। मुरैना नगर निगम में बीजेपी के कई दिग्गज पार्षद भी थे, जिन्हें हार का सामना करना पड़ा है। इसका मतलब यह है कि ग्वालियर के बाद चंबल की सबसे हॉट सीट कही जाने वाली मुरैना नगर निगम पर भी अब कांग्रेस का कब्जा हो गया है। यह कहा जा सकता है कि इस बार चंबल में सिंधिया और तोमर का जादू पूरी तरह से नाकाम हो गया।
सरकार ने झोंकी थी पूरी ताकत
मुरैना नगर निगम पर बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी थी। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया और वीडी शर्मा जैसे दिग्गजों ने पूरी ताकत के साथ यहां प्रचार किया था। सिंधिया अपने इस गढ़ में वार्ड-वार्ड भ्रमण करते नजर आए। इसके बाद भी शहर की जनता ने बीजेपी को पूरी तरह से नकार दिया। संघ और तोमर की पसंद से यहां पर बीजेपी प्रत्याशी को मैदान में उतारा गया था, लेकिन भाजपा की कोई भी रणनीति काम नहीं आई।
कई दिग्गज नेताओं की साख को लगा बट्टा
ग्वालियर और मुरैना सीट हारने के बाद बीजेपी के कद्दावर नेताओं की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर अपने इलाकों में सफलता दिलाने में नाकाम रहे हैं। सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में तो पहले ही हार का सामना करना पड़ा है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि भाजपा नए सिरे से अपनी रणनीति पर विचार करें।