अपने घर में कोविड-19 का इलाज कराते हुए महामारी के चंगुल से बाहर आने में इंदौर नगर निगम का 'इंदौर 311' मोबाइल एप मरीजों के लिए काफी मददगार साबित हुआ है।
यह एप हालांकि जिले में कोविड-19 के प्रकोप से पहले से प्रचलित है, लेकिन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अप्रैल के अंत में इस महामारी के मरीजों के होम क्वारंटीन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद स्थानीय प्रशासन ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की विशेषज्ञ टीम की मदद से इस ऐप में नये फीचर जोड़े हैं।
इस टीम में शामिल तकनीकी जानकार डॉ. सुबोध चतुर्वेदी ने बताया कि गृह पृथकवास वाले मरीजों की सेहत की अद्यतन जानकारी मोबाइल एप के जरिए कोविड-19 के स्थानीय नियंत्रण कक्ष तक उसी समय (रीयल टाइम में) पहुंच रही है।
उन्होंने बताया कि कोविड-19 का घर में रहकर इलाज करा रहे मरीजों को पल्स ऑक्सीमीटर नाम का उपकरण भी दिया जा रहा है। इस छोटे-से उपकरण के जरिए मरीज के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर और उसकी नब्ज की घर में ही जांच की जा रही है।
चतुर्वेदी ने बताया, 'पहले से तैयार प्रश्नावली के मुताबिक मरीज का केयरगिवर (तीमारदार) मोबाइल एप में हर रोज यह जानकारी भी दर्ज करता है कि कहीं उसे 101 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा बुखार या सांस लेने में तकलीफ तो नहीं है?'
उन्होंने बताया कि कोविड-19 के नियंत्रण कक्ष में तैनात डॉक्टर इस महामारी के मरीजों की सेहत के सूचकांकों को लेकर ऐप में दर्ज जानकारी पर लगातार नजर रख रहे हैं और इसके मुताबिक उन्हें उचित परामर्श दे रहे हैं। जरूरत पड़ने पर त्वरित प्रतिक्रिया दल (आरआरटी) मरीजों को उनके घरों से अस्पताल भिजवा रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इंदौर जिले में अब तक कोविड-19 के कुल 4,329 मरीज मिले हैं, जिनमें से 197 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,185 लोग इलाज के बाद संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। इनमें गृह पृथकवास में रखे गए मरीज भी शामिल हैं।