जीएसटी और इनकम टैक्स रिटर्न भरने के नाम पर एक व्यापारी से वर्षों तक बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। टैक्स सलाहकार ने व्यापारी के जीएसटी अकाउंट में दर्ज मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी बदलकर रिफंड से जुड़ी सारी जानकारी अपने कब्जे में ले ली। फर्जी बिलों के जरिए जीएसटी रिफंड अन्य फर्मों को पास कराया गया और बदले में लाखों रुपये कमीशन के रूप में वसूले गए। यह फर्जीवाड़ा करीब सात साल तक चलता रहा, जबकि व्यापारी को इसकी जानकारी तक नहीं लगी।
कोतवाली पुलिस के अनुसार रामटेकरी निवासी प्रभुलाल माली का जीएसटी और इनकम टैक्स का काम पिछले 7–8 वर्षों से नीलेश सिंह देख रहा था। इसी दौरान आरोपी ने चुपचाप जीएसटी पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी बदल दी, जिससे रिफंड और टैक्स से जुड़े सभी संदेश सीधे उसी तक पहुंचते रहे। मई 2025 में रिटर्न भरने के दौरान आरोपी से संपर्क नहीं हो सका। बाद में व्यापारी और उसके बेटे ने आरोपी के किराए के मकान पर जाकर जानकारी ली, जहां पता चला कि वह 5–6 महीने पहले ही मकान खाली कर फरार हो चुका है। इसके बाद दूसरे टैक्स सलाहकार से संपर्क करने पर पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी बिलों के माध्यम से जीएसटी रिफंड अन्य फर्मों को पास किया और कमीशन लिया। पुलिस ने अब तक 15 से 20 लाख रुपये के नुकसान की पुष्टि की है। वास्तविक राशि आरोपी के लैपटॉप, टैली अकाउंट और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के बाद स्पष्ट होगी। आरोपी के कई बैंक खातों की जानकारी भी मिली है, जिन्हें फ्रीज करने की प्रक्रिया जारी है।
कोतवाली पुलिस ने आरोपी को करीब 800 किलोमीटर दूर मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। पूछताछ में संकेत मिले हैं कि इसी तरह अन्य खातों में भी हेराफेरी की गई हो सकती है। पुलिस उन फर्मों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्हें अवैध रूप से जीएसटी रिफंड पास किया गया। मामले में कोर्ट से आरोपी का 8 दिन का पुलिस रिमांड मिला है और आगे की जांच जारी है।