हड़ताल का प्रभाव अब जिला से लेकर ग्रामीण स्तर तक दिख रहा है। गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, ओपीडी, इमरजेंसी सेवाएं और लैब प्रभावित हो रहे हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने हड़ताल के पांचवें दिन मंदसौर विधायक विपिन जैन के कार्यालय के बाहर लोट लगाकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। विधायक जैन ने सभी कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि वे कर्मचारियों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अवगत करवाएंगे। साथ ही कैबिनेट बैठक में भी संविदा कर्मचारियों की मांगों को रखेंगे।
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संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत 20 वर्षों से अधिक समय से 70 प्रतिशत कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से देते आ रहे हैं। मन्दसौर जिले में संविदा कर्मचारियों ने टीबी मुक्त अभियान में दिल लगाकर कार्य कर मंदसौर जिले को प्रदेश में प्रथम स्थान दिलाया। कोरोनाकाल जैसे गंभीर महामारी में भी अपने परिवार एवं जीवन की परवाह किए बगैर सेवाएं दीं, उसके बावजूद हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है।
एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष डॉक्टर शुभम सिलावट बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल के द्वारा संविदा कर्मचारियों को दी गई सुविधाओं में कटौती की गई है। डॉक्टर सिलावट ने कहा कि वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से यह घोषणा की थी कि राज्य में कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं दी जाएंगी। इसमें कैजुअल लीव मेडिकल लीव, अप्रेजल सिस्टम, और नेशनल पेंशन स्कीम से बाहर रखने का प्रावधान शामिल था। उस घोषणा ने हजारों संविदा कर्मचारियों के जीवन में नई आशा की किरण जगाई थी, लेकिन 2025 में सत्ता परिवर्तन के साथ जारी की गई नई स्वास्थ्य नीति में इन घोषणाओं को पूरी तरह से हटा दिया गया, जिससे कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चित कालीन हड़ताल का असर अब जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर और ग्रामीण क्षेत्रों तक दिखाई देने लगा है। गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, बुखार व मौसमी बीमारियों के इलाज में देरी होने लगी है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनुपस्थिति से अस्पतालों की ओपीडी व्यवस्था, इमरजेंसी ड्यूटी और लैब सेवाएं बाधित हो रही हैं। मरीजों को अब उपचार के लिए या तो प्राइवेट क्लीनिक की ओर रुख करना पड़ रहा है या फिर लंबी कतारें झेलनी पड़ रही है।