आदिवासी बहुल मंडला जिले के नैनपुर में स्कूल यूनिफॉर्म में छात्राओं द्वारा शराब दुकान से शराब खरीदने का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दुकान संचालक पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
घटना शुक्रवार को उस समय सुर्खियों में आई, जब शराब दुकान पर स्कूली छात्राओं द्वारा शराब खरीदते हुए तस्वीर और सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। फुटेज में साफ नजर आया कि स्कूल ड्रेस पहने कुछ छात्राएं दुकान के सामने पहुंचीं। खुद को छिपाने की कोशिश करते हुए उन्होंने अपने सिर पर दुपट्टा डाला, शराब खरीदी और चुपचाप वहां से निकल गईं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल सक्रियता दिखाई। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम आशुतोष ठाकुर ने अविलंब मौके पर पहुंचकर दुकान का औचक निरीक्षण किया और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की।
एसडीएम ने प्रारंभिक जांच में ही स्कूली छात्राओं को शराब बेचे जाने की पुष्टि की। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि नाबालिगों को नशीले पदार्थ बेचना लाइसेंस की शर्तों का गंभीर उल्लंघन है। अभिकर्ता द्वारा गलती स्वीकार करने के बाद कलेक्टर ने दुकान संचालक पर दो लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है।
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जिला आबकारी अधिकारी रामजी पांडे ने बताया कि एक विशेष जांच टीम भी मामले की पड़ताल कर रही है। विभाग इस बात की भी गहन जांच कर रहा है कि शराब खरीदने वाली लड़कियों की उम्र 18 वर्ष से कम थी या अधिक क्योंकि अवयस्क को शराब बेचना जीएलसी का सीधा उल्लंघन है।
घटना को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और आबकारी विभाग पर तीखा हमला बोला है। पूर्व विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले ने इसे बड़ी लापरवाही करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन बच्चियों को विद्या के मंदिर में होना चाहिए, वे अंग्रेजी शराब दुकान से शराब खरीद रही हैं। इस शर्मनाक घटना पर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने एक स्वर में दुकान का लाइसेंस रद्द करने और उसे नगर क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित करने की पुरजोर मांग की है।
नैनपुर की यह घटना केवल एक कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। स्कूल यूनिफॉर्म में छात्राओं का शराब दुकान तक पहुंचना और दुकानदार का बिना किसी जांच-पड़ताल के उन्हें शराब बेच देना एक खतरनाक सामाजिक तस्वीर पेश करता है।