सार
महेश्वर स्थित श्री राम कुटी में 5 जून से 9 दिवसीय पंचकुण्डीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ शुरू होगा। नर्मदा तट पर वैदिक मंत्रोच्चार, नौका विहार, विष्णु महापुराण व श्रीमद्भागवत पाठ तथा विष्णु सहस्त्रनाम के 1100 पाठ से आध्यात्मिक वातावरण बनेगा।
मां नर्मदा की शांत लहरों, पीपल की पावन छांव और संतों की तपोभूमि के बीच महेश्वर एक बार फिर अद्भुत आध्यात्मिक चेतना का साक्षी बनने जा रहा है। पवित्र पुरुषोत्तम मास के शुभ संयोग में 05 जून से जय-जय सियाराम बाबा की तपस्थली श्री राम कुटी में 09 दिवसीय पंचकुण्डीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का शुभारंभ होगा, जहां भक्ति, वैदिक परंपरा और जनकल्याण का अलौकिक संगम दिखाई देगा।
नर्मदा तट पर बनने वाली पंचकुण्डीय यज्ञशाला में प्रतिदिन वैदिक मंत्रों की गूंज के साथ भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का दिव्य नौका विहार, विष्णु महापुराण एवं श्रीमद्भागवत महापुराण का मूल पाठ, तथा विष्णु सहस्त्रनाम के 1100 पाठ संपन्न होंगे। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और ईश्वर से जुड़ाव का एक दुर्लभ अवसर माना जा रहा है।
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विशेष बात यह है कि भगवान विष्णु को समर्पित पुरुषोत्तम मास में यह भव्य आयोजन मां नर्मदा के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे निर्मित यज्ञशाला में होगा, जो श्रद्धा और सनातन परंपरा की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करेगा। यह दिव्य आयोजन, श्री श्री 1008 श्रीमहावीर दास महाराज श्री श्री 1008 श्री जामवंत दास जी महाराज तपस्वी एवं श्री श्री 1008 श्री प्रेमदास जी महाराज के शुभ आशीर्वाद तथा सेठ गिरधारी लाल अग्रवाल, किष्किंधा धाम इंदौर के शुभ संकल्प से सम्पन्न हो रहा है।
संतों का कहना है कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सद्भाव, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का जागरण है। इस महायज्ञ में दर्शन, परिक्रमा और प्रसाद ग्रहण करने वाले श्रद्धालुओं पर भगवान नारायण की कृपा बरसेगी और जीवन के मंगल मनोरथों की सिद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।