मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की राजनीति भी करवट बदल रही है। 2013 के चुनावों में यहां कांग्रेस को केवल एक सीट पर संतोष करना पड़ा था। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ और भी बन रही है। संजय शुक्ला, अश्विन जोशी, सत्यनारायण पटेल, जीतू पटवारी और तुलसीराम सिलावट, ये सब नाम उन नेताओं के हैं, जो पिछले लगभग एक दशक से विधानसभा पहुंचने की बाट जोह रहे थे। लेकिन जनता का आशीर्वाद उन्हें नहीं मिल रहा था। लेकिन इस बार के नतीजों में यह सभी आगे चल रहे हैं। यदि यह रुझान जीत में बदल गए तो यह इंदौर की राजनीति का नया दौर बन जाएगा।
ऐसा लगता है इस बार भाजपा से नाराजगी का फायदा इन सभी नेताओं को मिला है। जिन नेताओं के लिए यह माना जाने लगा था कि उनका राजनैतिक कॅरियर खत्म होता जा रहा है, वो सभी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और मध्यप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने पुत्र आकाश विजयवर्गीय को इंदौर की तीन नंबर विधानसभा सीट से टिकट दिलवाया, लेकिन उनकी जीत होती नहीं दिख रही है। पुराने दिग्गज कांग्रेसी नेता अश्विन जोशी के आगे आकाश का सिक्का नहीं चल पा रहा है।
खास बात यह है कि इंदौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी चुनावी रैली कर चुके हैं। लेकिन यह रैली वोटों में कितनी तब्दील हुई, यह समझने वाली बात होगी। भाजपा के लिए मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव जीतना बेहद आवश्यक था, क्योंकि यहीं से 2019 की जीत की राह निकलती है।
यहां की ऊंच-नीच का असर लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। हालांकि भाजपा नेता शायना एनसी ने प्रारंभिक रुझानों के बाद ही कहा था कि पांच विधानसभा चुनावों के नतीजों का असर 2019 के चुनावों पर नहीं पड़ेगा। फिलहाल मुकाबला रोचक दौर में है और यह देखना दिलचस्प होगा कि मध्यप्रदेश में देर शाम तक सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा।