पीठ ने याचिकाकर्ताओं के उस सुझाव को ठुकरा दिया, जिसमें कहा गया था कि कर्नाटक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल बंगलूरू में 16 बागी विधायकों से मिल सकते हैं ताकि पता लगाया जा सके कि क्या उन्हें बंदी बनाया गया है।
आज सुनवाई नहीं हुई तो आसमान नहीं गिरेगा : कांग्रेस
मध्यप्रदेश कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने सुनवाई टालने की गुजारिश करते हुए कहा, आज सुनवाई नहीं हुई तो आसमान नहीं गिर जाएगा। कांग्रेस ने बहुमत से सरकार बनाई और अब उसके विधायकों को बंधक बनाया गया है। विधायकों को रिहा किया जाए, क्योंकि उनका अपहरण किया गया है। इस मामले को सांविधानिक पीठ को भेजा जाए, ताकि ऐसी हरकत दोबारा न हो। राज्यपाल फ्लोर टेस्ट के लिए कैसे कह सकते हैं?
भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान की ओर से रोहतगी ने कहा, कांग्रेस ने 1975 में इमरजेंसी लगाई थी। पार्टी सत्ता में रहना चाहती है। विधायकों ने इस्तीफा दिया है और जनता के पास दोबारा जाना चाहते हैं। यह दलबदल का मामला नहीं है। राज्यपाल सांविधानिक मुखिया हैं। उन्हें राष्ट्रपति को राज्य में सांविधानिक तरीके से चल रहे शासन की रिपोर्ट देनी होती है। अगर बहुमत नहीं है तो ही वह फ्लोर टेस्ट के लिए कहते हैं।
बागी विधायक बोले, हमने विचारधारा के चलते दिया इस्तीफा
बागी विधायकों की तरफ से वकील मनिंदर सिंह ने कहा, इस्तीफा लोकतंत्र मजबूत करने के लिए है। हमने वैचारिक मतभेदों के कारण इस्तीफा दिया। क्या स्पीकर इस्तीफे को लटका सकते हैं? विधायकों का अपहरण नहीं हुआ था। सरकार बहुमत खो चुकी है। फौरन फ्लोर टेस्ट हो।
मप्र के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह बुधवार को बागी विधायकों से मिलने बंगलूरू पहुंचे। विधायकों से जबरन मिलने की कोशिश में पुलिस ने दिग्विजय समेत 10 कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया। धरने पर बैठे दिग्विजय ने विधायकों से मिलने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दी, जिसे कोेर्ट ने खारिज कर दिया। इससे पहले बागी विधायकों ने वीडियो जारी कर दिग्विजय से मिलने से इनकार किया। वहीं, कांग्रेस के 70 विधायकों ने भोपाल में राज्यपाल लालजी टंडन से मिलकर अपने विधायकों की रिहाई की अपील की।