फिल्म महोत्सव के बारे में तो अक्सर सुनने-पढ़ने में आता है। फिर वह चाहे देश में हो या विदेश में, लेकिन आपको हम ऐसे फिल्म फेस्टिवल के बारे में बताएंगे जो अपने आप में अनूठा है। ये फिल्म फेस्टिवल होगा धार्मिक नगरी उज्जैन में और यहां संस्कृत में ही फिल्में दिखाई जाएंगी। 21 से 27 फरवरी तक संस्कृत फिल्म महोत्सव आयोजित किया जाएगा।
संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए उज्जैन में अनूठा कार्यक्रम होने वाला है। महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय और कालिदास संस्कृत अकादमी ने संयुक्त रूप से इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसे संस्कृत फिल्म महोत्सव नाम दिया गया है। नए साल में 21 से 27 फरवरी के बीच यह महोत्सव होगा जिसमें संस्कृत भाषा में फिल्में दिखाई जाएंगी। संस्कृत फिल्म आदि शंकराचार्य, मुद्राराक्षस, अहं ब्रह्मास्मि, प्रियवासनम, नमोः दृष्टिही, अनुरक्तिः जैसी फिल्मों का प्रदर्शन होगा। कालिदास संस्कृत अकादमी में शाम के समय ये फिल्में दिखाई जाएंगी। इसका उद्देश्य लोक मनोरंजन के साथ देवभाषा संस्कृत का प्रचार-प्रसार करना है। देशभर में संस्कृत नाटक तो खूब होते हैं, मगर संस्कृत में फिल्में अन्य भाषाओं के मुकाबले बहुत कम बनती है। संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने में फिल्मों का बड़ा योगदान हो सकता है। यदि संस्कृत फिल्में ज्यादा बनेंगी तो रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। खास बात यह है कि मध्यप्रदेश में संभवतः संस्कृत फिल्म अब तक नहीं बनी है। इसलिए जितनी भी फिल्मों का चयन हुआ है, वो दक्षिण भारत की हैं। फिल्म फेस्टिवल के आगे के प्रारूप पर भी विचार किया जा रहा है। कैसे इसे अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाए और अधिकाधिक लोग इससे जुड़े इसकी रूपरेखा बनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि संस्कृत फिल्म फेस्टिवल की परिकल्पना महर्षि पाणिनि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सी. विजयकुमार की है। इस तरह के फिल्म फेस्टिवल महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अन्य राज्य में हो चुके हैं। मध्यप्रदेश में इस तरह का फिल्म महोत्सव पहली बार होगा। इसमें जो फिल्म अनुरक्ति शामिल की गई है वह थ्रीडी है। इस लिहाज से भी यह महोत्सव खास रहने वाला है।