मुख्यमंत्री कमल नाथ के नेतृत्व में सरकार ने प्रदेश को माफियामुक्त बनाने के लिए संगठित अपराधियों, मिलावटखोरों के खिलाफ जो अभियान छेड़ा वह भाजपा को रास नहीं आया, क्योंकि उनके पंद्रह साल के कार्यकाल में भी यह पूरा माफिया फला और पोषित हुआ।
यही नहीं 14 माह के शासन में कांग्रेस सरकार ने ई-टेंडर, पौधरोपण, बुंदेलखंड पैकेज में भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए भीषणतम भ्रष्टाचार पर कार्रवाई प्रारंभ की। इससे भाजपा में भय व्याप्त हो गया और उसने कांग्रेस सरकार के खिलाफ षडयंत्र रचना शुरू कर दिया।
कांग्रेस के निंदा प्रस्ताव में कहा गया कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने पहले कुछ कांग्रेस के और फिर निर्दलीय विधायकों को प्रलोभित किया। उन्हें निजी विमान से दिल्ली और बंगलूरू ले जाकर मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ साजिश रची।
जब वे इसमें सफल नहीं हुए तो उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का तुष्टिकरण करते हुए प्रजातंत्र के सारे नैतिक मूल्यों को ताक में रखकर कांग्रेस सरकार को मिले जनादेश को अपमानित और कंलकित करने की कुचेष्टा की गई। जिसकी कांग्रेस विधायक दल घोर भर्त्सना करता है।
बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और प्रभारी मध्यप्रदेश सुधांशु त्रिपाठी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और सांसद विवेक तन्खा मौजूद रहे।
भोपाल में विधायक दल की बैठक के बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से बहुमत साबित करने को लेकर बयान आया। पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता शोभा ओझा और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने दावा किया है कि हमारे पास संख्या है और हम विधानसभा में अपनी गिनती सिद्ध करेंगे। उन्होंने कहा कि सिंधिया के समर्थक विधायक सभी हमारे संपर्क में हैं, समय आने पर वे भी सामने आएंगे।
ओझा ने मीडिया से कहा कि बैठक अच्छी रही। निर्दलीय सहित सभी कांग्रेस विधायक मौजूद थे। हमारे पास संख्या है, हम यह लड़ाई एक साथ लड़ेंगे। कुछ विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए राज्यसभा की सीट की मांग को लेकर उनके समर्थन में थे। लेकिन जब उनके (ज्योतिरादित्य सिंधिया के) भाजपा में जाने की चर्चा शुरू हुई, तो ये विधायक नाराज हो गए। वे सभी मुख्यमंत्री के संपर्क में हैं।
सरकार को कोई खतरा नहीं है, हम विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। वहीं कांग्रेस पार्टी के नेता लक्ष्मण सिंह का कहना था कि अगर जरूरत पड़ी तो कांग्रेस चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। हमारे पास अभी 94 विधायक हैं, कोई भी पार्टी का मनोबल नहीं तोड़ सकता।
बता दें कि भाजपा नेता भूपेंद्र सिंह के जरिए बंगलूरू से अपने इस्तीफे भेजने वाले छह मंत्रियों में तुसली सिलावट (सांवेर) , गोविंद सिंह राजपूत (सुरखी), डॉ. प्रभुराम चौधरी (सांची), इमरती देवी (डबरा), प्रद्युन्न सिंह तोमर (ग्वालियर) और महेंद्र सिंह सिसोदिया (बमोरी) शामिल हैं।
जबकि बंगलूरू से त्यागपत्र भेजने वाले विधायकों में हरदीप सिंह डंग (सुवासरा), राज्यवर्घन सिंह (बदनावर), ब्रजेंद्र सिंह यादव (मुंगावली), जसपाल जज्जी (अशोक नगर), सुरेश धाकड़ (पोहरी), जसवंत जाटव (करेरा), रक्षा संतराम सरोनिया (भांडेर), मुन्नालाल गोयल (ग्वालियर पूर्व), रणवीर जाटव (गोहद), ओपीएस भदौरिया (मेहगांव), कमलेश जाटव (अम्बाह), गिरिराज दंडोतिया (दिमनी) और रघुराज कंसाना (मुरैना) शामिल हैं।
ये सभी विधायक वहां एक रिसॉर्ट में ठहरे हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के तीन अन्य विधायकों बिसाहूलाल सिंह (अनूपपुर), एदल सिंह कंसाना (सुमावली) और मनोज चौधरी (हाटपिपल्या) ने भोपाल में इस्तीफा दिया है।
प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करूंगा: विधानसभा अध्यक्ष
इससे पहले बंगलूरू में ठहरे कांग्रेस के 19 बागी विधायकों के त्यागपत्रों की मूल प्रति भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को सौंपी। विधायकों के इस्तीफों की मूल प्रति विशेष विमान से यहां लाई गई थी। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि इस्तीफे दिए गए हैं। नियमानुसार कार्रवाई करूंगा।