सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई टल गई है। अब यह सुनवाई 15 दिसंबर को सुबह 10:30 बजे होगी। मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की वजह से जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के आरक्षण की कार्यवाही भी 18 दिसंबर को होगी।
कांग्रेस के सैयद जाफर और जया ठाकुर की याचिका में मध्य प्रदेश सरकार के नए अध्यादेश को चुनौती दी गई है। नए अध्यादेश में कमलनाथ सरकार के फैसले को पलटा गया है। अध्यादेश में यह तय किया गया है कि पूर्व की व्यवस्था के अनुसार ही पंचायत चुनाव होंगे। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने तीन चरणों में पंचायत चुनाव कराए जाने की घोषणा की थी। पहले और दूसरे चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया सोमवार को शुरू हो गई है। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ही याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई थी। सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने पैरवी की।
कांग्रेस नेता सैयद जाफर ने सोशल मीडिया पर कहा कि "क्या मध्य प्रदेश सरकार और राज निर्वाचन आयोग को अपनी गलती का एहसास होने लगा है? जिला पंचायत अध्यक्षों का होने वाला आरक्षण स्थगित करते हुए 18 दिसंबर की नई तारीख दे दी गई है। हमारा सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से निवेदन है कि वह पंचायत चुनाव भी रोटेशन से कराने में विचार करें। मध्य प्रदेश में 2 साल से पंचायत प्रतिनिधि बनने की उम्मीद लगाकर बैठे लाखों उम्मीदवारों की उम्मीद और उनके अधिकारों की रक्षा करें।"
जिला पंचायत अध्यक्ष का आरक्षण शनिवार को
पंचायत राज संचालनालय ने 13 दिसंबर को पत्र जारी कर 14 दिसंबर को आयोजित जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के आरक्षण की कार्यवाही भी आगे बढ़ा दी है। संचालनालय ने सभी कलेक्टरों और जिला पंचायतों के सीईओ को जारी पत्र में स्पष्ट किया कि यह कार्यवाही अब 18 दिसंबर को होगी।