भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार रात को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और मंगलवार को उन्होंने विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया। बहुमत साबित करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा।
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया पर जनादेश को निलाम करने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए मध्यप्रदेश की जनता के नाम खुला पत्र लिखा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों सिंधिया 22 विधायकों को लेकर पार्टी से अलग हो गए थे। सिंधिया के समर्थित 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया जिसके बाद कमलनाथ सरकार गिर गई।
दिग्विजय ने कहा कि यह बेहद दुखद घटनाक्रम है जिसने न सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं बल्कि उन सभी नागरिकों की आशाओं और संघर्ष पर पानी फेर दिया, जो कांग्रेस की विचारधारा में यकीन रखते हैं। मुझे बेहद दुख है कि सिंधिया उस समय भाजपा में गए, जब भाजपा खुलकर आरएसएस के असली एजेंडा को लागू करने के लिए देश को पूरी तरह बांट रही है। कुछ लोग यह कह रहे हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस में उचित पद और सम्मान मिलने की संभावना समाप्त हो गई थी, इसलिए वह भाजपा में चले गए, लेकिन ये गलत है।
यदि वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनना चाहते थे, तो ये पद उन्हें 2013 में ही ऑफर हुआ था और तब उन्होंने केंद्र में मंत्री बने रहना पसंद किया था। यही नहीं, 2018 में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हें उपमुख्यमंत्री पद संभालने का न्योता भी दिया था। लेकिन उन्होंने स्वयं इसे अस्वीकार कर अपने समर्थक तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश कर दी थी। कमलनाथ तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार नहीं हुए और हाल के घटनाक्रम ने ये साबित भी कर दिया है कि वे सही थे।
तुलसी सिलावट न सिर्फ भाजपा में गए, बल्कि ऐसे समय में गए, जब राज्य में कोरोना वायरस की महामारी से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्री के नाते उन्हीं की थी। सिंधिया ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस सरकार का उप मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे, जो न सिर्फ कांग्रेस विचारधारा के प्रति बेइमान निकला, बल्कि पूर्ण रूप से गैर जिम्मेदार भी साबित हुआ है।