सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की ओर से जो फॉर्मूला तय हुआ है, उसमें सिंधिया को राज्यसभा भेजने और कैबिनेट में जगह देने का प्रस्ताव है। सहमति हो गई तो कमलनाथ सरकार का जाना तय है। सिंधिया लंबे समय से भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। बीते दिनों उन्होंने शिवराज के घर जाकर उनसे मुलाकात भी की थी।
यह पूरा सियासी ड्रामा एक सप्ताह पहले शुरू हुआ था, जब कांग्रेस के दस विधायक लापता हो गए थे। इसके बाद पार्टी नेता दिग्विजय सिंह ने शिवराज सिंह चौहान व नरोत्तम मिश्रा पर विधायकों को 25 से 35 करोड़ रुपये देने का आरोप लगाया था। लापता विधायकों में पांच को अगले ही दिन भोपाल लाया गया था।
जबकि निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा, कांग्रेस विधायक बिसाहू लाल सिंह और रघुराज कंसाना भी वापस लौट आए थे। हालांकि एक कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह डंग ने इस्तीफा दे दिया था। विधायकों के लौटने के बाद कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि सरकार को कोई खतरा नहीं है।
इससे पहले, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात की। मुलाकात के बाद सीएम ने कहा, भाजपा से अब रहा नहीं जा रहा है। उन्होंने 15 सालों में जो भ्रष्टाचार किया है, वह सामने आने जा रहा है। इसलिए वे बेचैन हैं और सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं। कांग्रेस विधायक तीर्थ यात्रा पर हैं और जल्द ही लौट आएंगे। हालांकि, इस बीच कमलनाथ दिल्ली से शाम को ही भोपाल लौट आए और दिग्विजय सिंह समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात की।
सियासी उठापटक के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र 16 मार्च से शुरू होगा और भाजपा पहले ही दिन कमलनाथ सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। भाजपा ने मंगलवार शाम पार्टी कार्यालय में अपने विधायकों की बैठक बुलाई है, जिसमें पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल का नेता चुना जा सकता है।