मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर के बीच से बैतूल-ओबेदुल्लागंज नेशनल हाईवे-69 के निर्माण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या उन्होंने हाईवे बनाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की अनुमति ली है? अगर नहीं ली है तो क्यों?
जस्टिस शील नागू और जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की बेंच इस मामले की अगली सुनवाई 21 मार्च को करेगी। हाईकोर्ट ने अमरावती निवासी एडविट किओले की याचिका में कहा है कि बैतूल-औबेदुल्लागंज के बीच नेशनल हाईवे-69 बन रहा है। यह हाईवे महाराष्ट्र के मेलघाट और मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बीच से गुजरता है। यह दोनों ही टाइगर रिजर्व हैं, जो देश के 32 टाइगर कॉरिडोर में शामिल हैं। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में बाघ और अन्य वन्यजीव हैं। अगर हाईवे बना तो वन्य जीवन खतरे में पड़ सकता है। टाइगर कॉरिडोर में सड़क बनाने के लिए NTCA की अनुमति आवश्यक है। इससे अनुमति लिए बिना ही NHAI ने सड़क पर काम शुरू कर दिया है। बडी संख्या में पेड़ों की कटाई हो रही है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और तान्या तिवारी ने पक्ष रखा।
वन्यप्राणियों के आवागमन की सुविधा बनाई जाए
याचिका कहती है कि विरोध विकास कार्य का नहीं है। NTCA ने वन्य प्राणियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाईवे बनाने के दौरान जानवरों के आवागमन के लिए अंडर तथा ओवर मार्ग बनाने तथा पुलिया सहित अन्य दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसका पालन हाईवे बनाने में नहीं हो रहा है। इससे वन्य प्राणियों के जीवन पर असर पड़ सकता है। याचिका में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, क्लाइमेट चेंज विभाग के सचिव, NTCA, NHAI, नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड के चेयरमैन, मध्य प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव और पीसीसीएफ को पार्टी बनाया गया है।