मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति देने वाले आदेश को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई टाल दी है। यह मामला जस्टिस शील नागू और जस्टिस पीके कौरव की बैंच के सामने गया था। चूंकि, इस मामले में जस्टिस कौरव पहले राज्य सरकार के वकील रहे हैं, इस वजह से उन्होंने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले को किसी और बैंच के सामने पेश करने के निर्देश दिए।
कोरोना काल में स्कूल प्रबंधन को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने की अनुमति राज्य सरकार ने दी थी। यानी सिर्फ ट्यूशन फीस ही ली थी। इसके बाद 22 नवंबर 2021 को राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर केवल ट्यूशन फीस वसूलने के आदेश को शून्य घोषित कर दिया। साथ ही स्कूलों को 10% फीस बढ़ाने की छूट दी गई है। इसी को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव ने जनहित याचिका दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि उनकी याचिका पर हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे और तब राज्य सरकार ने सिर्फ ट्यूशन फीस लेने का आदेश स्कूलों के लिए जारी किया था।
याचिकाकर्ता के वकील दिनेश उपाध्याय ने कहा कि कोरोना संक्रमण पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। प्रदेश में रोजाना कोरोना संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। इसके बाद भी सरकार ने पुराने नोटिफिकेशन को शून्य घोषित कर स्कूलों को 10% फीस बढ़ाने की छूट दी है। यह हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी।