इस बार मध्यप्रदेश में औसत से 33% अधिक बारिश हुई है। बारिश से अभी तक आठ हजार करोड़ की फसल और 1800 से दो हजार करोड़ रु. की सड़क, मकान आदि का नुकसान हुआ है।
अगर कुल मिलाकर देखें तो 10 हजार करोड़ की नुकसान सामने आया है। इस आंकड़े में बढ़ोतरी भी हो सकती है। मंगलवार तक इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी जाएगी, ताकि केंद्र की तरफ से राहत राशि मिल सके। मुख्य सचिव सीएस मोहंती ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी।
पशुपतिनाथ मंदिर में तीन दिन से पट बंद, बाबा को न भोग लगा, न आरती हुई
बाढ़ के चलते मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन करने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। शनिवार को मंदिर में प्रतिमा जलमग्न होने के बाद से यहां सफाई का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में तीन दिनों से न भोग लगाया गया है, न किसी समय की आरती की गई। पट तीन दिनों से बंद हैं।
वहीं, सोमवार को भी गांधी सागर बांध के सभी 19 गेट खुले रहे। लेकिन धीरे-धीरे बांध का जलस्तर कम होता जा रहा है। शाम तक यह 1318 से घटकर 1314 फीट रह गया।
शनिवार शाम तक बांध का वाटर लेवल 1318 दर्ज किया गया था। इसके बाद बांध में पानी की आवक करीब सवा लाख क्यूसेक ही हो रही है। बांध से छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं, मंगलवार को बांध के गेट बंद किए जा सकते हैं।
मुख्य सचिव मोहंती ने कहा है कि सभी सड़कों के सुधार का काम सितंबर के अंत तक शुरू हो जाएगा जिसे नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। सरकार की फसल बीमा के लिए इस बार 31 लाख से ज्यादा किसानों ने पंजीकरण कराया है। सरकार प्रीमियम का 509 करोड़ जमा कर रही है। अभी तक 57 हजार किसानों का क्लेम आ चुका है।
शिवराज बोले- केंद्र ने 1 हजार करोड़ दिए, बाद में बयान से मुकरे
बाढ़ प्रभावितों को राहत देने के मामले में सियासत गर्म हो गई है। सोमवार को पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मंदसौर में कहा कि केंद्र ने बाढ़ राहत कोष में 1000 करोड़ रु. दिए हैं। दोपहर में ही वे इस बात से मुकर गए। उनसे जब केंद्र सरकार द्वारा राहत राशि दिए जाने पर सवाल किया तो उन्होंने कुछ भी जवाब नहीं दिया।
वहीं, कलेक्टर मनोज पुष्प ने इस तरह की किसी राशि की घोषणा होने या फिर राहत कोष में आने जैसी जानकारी होने से इनकार कर दिया। इधर, जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र से शिवराज के इशारे पर राज्य आपदा कोष में 310 करोड़ रुपए नहीं दिए हैं।