स्नातकोत्तर डिग्रीधारक आरक्षक ने कहा, 'मैंने पिछले 10 दिन में यू-ट्यूब एवं अन्य स्रोतों से जानकारी जुटाकर एक वेल्डर की मदद से करीब 25,000 रुपये की लागत से एक चैम्बर बनाया है। जैसे ही कोई गाड़ी इस चैम्बर से गुजरती है, सेंसर की मदद से फव्वारे दवा का तेज छिड़काव शुरू कर देते हैं। इससे चंद सेकंड में गाड़ी को संक्रमणमुक्त किया जा सकता है।"
रघुवंशी ने बताया कि उनके बनाये चैम्बर को डीआरपी लाइन में लगाया गया है जहां पुलिस की सभी गाड़ियों को नियमित रूप से संक्रमणमुक्त किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी जिले के 170 से ज्यादा रोकथाम क्षेत्रों (कंटेनमेंट जोन) और कोरोना वायरस के संक्रमण के लिहाज से अन्य संवेदनशील इलाकों में ड्यूटी कर रहे हैं। कर्फ्यू और लॉकडाउन का पालन कराने के लिए भी पुलिस की गाड़ियां जिले में लगातार गश्त कर रही हैं।
अधिकारियों के मुताबिक जिले में अब तक दो आईपीएस अफसरों समेत करीब 15 पुलिसकर्मी कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। इनमें शामिल 41 वर्षीय पुलिस निरीक्षक की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। इलाज के बाद कुछ पुलिसकर्मी इस महामारी को मात भी दे चुके हैं।
इंदौर में कोरोना वायरस का पहला मरीज मिलने के बाद से प्रशासन ने 25 मार्च से शहरी सीमा में कर्फ्यू लगा रखा है, जबकि जिले के अन्य स्थानों पर सख्त लॉकडाउन लागू है।
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अमानगंज शहर में एक 19 वर्षीय मजदूर ने क्वारंटीन सेंटर में आत्महत्या कर ली। अमानगंज शासकीय महाविद्यालय में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में मंगलवार को सुबह एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
सेंटर में युवक के पांच और दोस्त भी साथ हैं। इसके अलावा सेंटर में बाहर से लाए गए मजदूरों को भी रखा गया है। युवक ने एक कमरे में खिड़की से रस्सी बांधकर फांसी लगा ली। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है, हालांकि, फांसी लगाने की वजह सामने नहीं आई है।
अमानगंज थाना प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि युवक महेवा का रहने वाला है। 24 अप्रैल को सागर जिले के गढ़ाकोटा से अपने पांच साथियों के साथ पन्ना आया हुआ था। स्वास्थ्य परीक्षण के लिए इन्हें अमानगंज शासकीय महाविद्यालय में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में रखा गया था।
गढ़ाकोटा में काम बंद हो जाने के कारण ये लोग बेरोजगार हो गए थे। ऐसे में युवक और उसके पांच दोस्त अपने घर लौटे तो प्रशासन ने अमानगंज के क्वारंटीन सेंटर में उन्हें रखा है। मंगलवार को ही युवक के पिता उसके गांव महेवा से मिलने भी आए थे। यहां मजदूरों की देखरेख, स्वास्थ्य परीक्षण और खाने-पीने आदि की व्यवस्था यहां की गई है।