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राम मंदिर भूमि पूजन से एक दिन पहले कमलनाथ करेंगे ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ

Sun, 02 Aug 2020 02:24 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, भोपाल
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कांग्रेस नेता कमलनाथ (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम तय होने से देश में इन दिनों बड़े राम भक्त होने की होड़ नेताओं के बीच शुरू हो गई है। इसी बीच मध्यप्रदेश कांग्रेस ने भी हिंदुत्व कार्ड खेलना शुरू कर दिया है।

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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाए जाने की शुरुआत का स्वागत करते हुए खुद को रामभक्त बताने की कोशिश की है और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होने वाले भूमिपूजन के कार्यक्रम से पहले कमलनाथ ने घर पर राम दरबार सजाने की तैयारी कर ली है। चार अगस्त को कमलनाथ के सरकारी निवास पर हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ा जाएगा, जिसमें कमलनाथ और कांग्रेस के कुछ नेता शामिल रहेंगे।

रविवार को कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि हनुमान चालीसा पाठ के दौरान सभी कोविड-19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाएगा। गुप्ता ने कहा कि "मंगलवार को कमलनाथ जी के निवास पर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। वह हनुमानजी के आराध्य भक्त हैं। उन्होंने पार्टी कैडर और नेताओं से भी मंगलवार को अपने घरों में 'हनुमान चालीसा' का पाठ करने के लिए कहा है।"
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शनिवार को कमलनाथ ने कहा था कि हर भारतीय की सहमति से अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित कार्यक्रम के पीछे के कारण के बारे में पूछे जाने पर गुप्ता ने कहा कि 'मंगलवार एक शुभ दिन है। इसमें बारे में कुछ नहीं कहा जाना चाहिए। यह विशुद्ध रूप से एक आध्यात्मिक कार्यक्रम है।'

उन्होंने कहा कि अप्रैल में 'हनुमान जयंती' पर, कमलनाथ अपनी सरकार के पतन के मद्देनजर अपने निर्वाचन क्षेत्र छिंदवाड़ा में एक भव्य वार्षिक धार्मिक आयोजन नहीं कर सके थे। लेकिन कुछ साल पहले, जब कमलनाथ सांसद थे तो छिंदवाड़ा जिले में हनुमान जी की 101 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करवाई थी।

इससे पहले भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी प्रदेशवासियों से हनुमान चालीसा का पाठ करने की अपील कर चुकी हैं। प्रज्ञा सिंह ठाकुर का दावा है हनुमान चालीसा पाठ से कोरोना से जल्दी मुक्ति मिलेगी। उन्होंने पांच अगस्त को अनुष्ठान कर इसका समापन राम लला की आरती के साथ करने की अपील की थी।

गौरतलब है कि इस साल मार्च में, कांग्रेस के 22 बागी विधायकों और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, जिससे राज्य में 15 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार गिर गई थी और कमलनाथ ने 20 मार्च को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद राज्य में भाजपा की सत्ता में वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ। मार्च के बाद से 25 विधायकों ने अब तक कांग्रेस के साथ-साथ राज्य विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है।

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