जल जीवन मिशन के लाभार्थियों से संवाद करते हुए शिवराज सिंह चौहान।
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को जल जीवन मिशन के लाभार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि गांवों में बड़ी दुर्गति थी। हमारी बहनों का आधा समय पानी भरने में निकल जाता था। सुबह 4 बजे से वह पानी के लिए लाइन में लग जाती थीं। बहनों के इस दर्द को मैंने बचपन से देखा और महसूस किया है। कांग्रेस ने 70 साल देश पर राज किया, पर हर घर पानी पहुंचाने का कभी नहीं सोचा।
मध्य प्रदेश में 46.11 लाख ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में कुशाभाऊ ठाकरे सभागार से लाभार्थियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संवाद किया। इस दौरान ग्रामवासी, जनप्रतिनिधि और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्य कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उन्होंने कहा कि 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल जीवन मिशन की घोषणा की। आधा पैसा केंद्र और आधा पैसा राज्य सरकार मिलाती है। इससे प्रदेश के हर गांव, हर घर में जल पहुंचा रहे हैं।
इनसे किया सीएम ने संवाद
मुख्यमंत्री ने सीहोर के सतपिपलिया से मंगलेश वर्मा, अनूपपुर के हर्राटोला जनपद पंचायत से ममता चंद्रवंशी, अशोकनगर की रचना विश्वकर्मा, जबलपुर के विपिन गर्ग, छिंदवाड़ा की वैशाली डोंगरे, दमोह की किरण शुक्ला, देवास के ज्ञानेश्वर कुमावत, मंडला की भगवती भामरे, रीवा की सविता पटेल और सिवनी के शरीफ खान से चर्चा की। इस दौरान सभी ने मुख्यमंत्री हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए आभार प्रकट किया।
किसानों को लगता है शुल्क
पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश के मंत्रियों ने नहर से सिंचाई पर शुल्क को लेकर अलग-अलग बयान दिए हैं। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया कि शुल्क नया नहीं है। कई वर्षों से किसानों को नॉमिनल शुल्क चुकाना होता है। नहरों से पानी लेने पर शुल्क देना होता है। कुछ दिन पहले 500 रुपये प्रति एकड़ शुल्क से जुड़े समाचार पर गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।