रामचरित मानस में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त 47 वर्षीय बाबा अवधेशपुरी प्रदेश के उज्जैन जिले से भाजपा का टिकट चाहते हैं। उज्जैन निवासी अवधेशपुरी ने दावा किया, 'मेरा विश्व हिन्दू परिषद एवं संघ परिवार से करीबी संबंध रहा है। मैंने भाजपा के लिए तब से काम किया है, जब वह वेंटीलेटर पर थी।' उन्होंने कहा, 'मैं टिकट के लिए भाजपा पर दबाव नहीं बनाउंगा। मेरे अनुयायी चाहते हैं कि मैं चुनाव लड़ूं ताकि उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ मेले की साइट पर जो अतिक्रमण हुआ है, उसे हटाया जा सके। भाजपा का टिकट न मिलने पर मैं निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं।'
संत मदन मोहन खड़ेश्वरी महाराज (45) ने बताया कि वह सिवनी जिले की केवलारी विधानसभा सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'मेरी जीत तय है। भाजपा टिकट नहीं देगी तो मैं निर्दलीय चुनाव लडूंगा। मैं पिछले 30 सालों से इस क्षेत्र के लोगों के लिए काम कर रहा हूं।' रायसेन जिले के संत रविनाथ महीवाले (42) ने भी विधानसभा चुनाव में उतरने के लिए अपना अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया, 'मैं नर्मदा को बचाने के लिए चुनाव लडूंगा। भाजपा यदि टिकट नहीं देगी, तो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने को मैं तैयार हूं।'
बाबा महेन्द्र प्रताप गिरी (35) रायसेन की सिलवानी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने बताया, 'मैं भाजपा से टिकट मांगूगा। न मिलने पर निर्दलीय लड़ूंगा।' गौरतलब है कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने इस साल अप्रैल में पांच हिन्दू बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है, जिनमें नर्मदानंद महाराज, हरिहरनंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भय्यूजी महाराज एवं पंडित योगेन्द्र महंत शामिल हैं। इनमें से भय्यूजी महाराज का हाल ही में निधन हो गया है।
बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने पर सरकार की तीखी आलोचना होने पर मुख्यमंत्री चौहान ने कहा था कि उनकी सरकार विकास एवं लोगों के कल्याण के लिए समाज के हर तबके के लोगों को जुटा रही है।