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मध्यप्रदेश चुनाव: इस बार राष्ट्रीय मुद्दों की गूंज, लग रहा लोकसभा चुनाव जैसा

Sun, 25 Nov 2018 04:11 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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BJP- Congress
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मध्यप्रदेश में चुनाव प्रचार का पहिया थमने में बस कुछ ही दिनों का समय बचा है। जहां एक और भाजपा लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी करना चाहती है वहीं कांग्रेस सत्ता में वापसी को बेकरार है। मगर दोनों ही पार्टियों के नेताओं के भाषण को सुनें तो लगता है कि विधानसभा चुनाव नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव हो रहा है।
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दोनों ही पार्टियों के वरिष्ठ नेता प्रचार में राष्ट्रीय मुद्दों को उठाकर एक-दूसरे पर हमला बोल रहे हैं। प्रदेश की जनता को राफेल डील और नेहरू-गांधी परिवार की नाकामी के विषय में बताया जा रहा है।

माना जा रहा था कि विधानसभा चुनावों में व्यापम घोटाले का शोर सुनाई देगा मगर शिवराज सिंह चौहान की कुर्सी हिलाने वाला यह मुद्दा चर्चा से गायब है। दिग्विजय सिंह जैसे नेता भी व्यापम घोटाले पर चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि कांग्रेस ने सत्ता में वापस आने पर व्यापम को खत्म करके नई नियुक्ति करने के लिए नई संस्था बनाने का वादा किया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी जनता को घोटाले में न्याय करने का भरोसा दिलाया है। 3000 करोड़ का ई-टेंडर घोटाला भी उस प्रमुखता से नहीं उठाया गया।
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कांग्रेस और भाजपा दोनों ही राम मंदिर और राफेल का मुद्दा इन चुनावों में उठा रहे हैं। इंदौर में हुई सभा में भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम ने मोदी सरकार की नीतियों को गलत बताया और उसपर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी आदिवासी बहुल झाबुआ में बिहार और उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए जनता से एक भी कांग्रेस उम्मीदवार को नहीं जिताने की अपील की।

कुल मिलाकर पार्टियां राष्ट्रीय मुद्दों को ज्यादा महत्व दे रही हैं जबकि नर्मदा बांध के जुड़े पुनर्वास का मुद्दा नदारद है। नर्मदा का मुद्दा केवल प्रभावित इलाके में उठाया गया। कांग्रेस भाजपा पर राम मंदिर और पकिस्तान जैसे मुद्दों को लेकर हमला बोल रही है जबकि भाजपा बिहार और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के खिलाफ गए नतीजों को आधार बना रही है।
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मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को चुनाव है। 11 दिसंबर को चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे।
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