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कैसे उत्तर प्रदेश के रहने वाले बाबूराम यादव से मध्यप्रदेश के बाबूलाल गौर बने पूर्व सीएम

Wed, 21 Aug 2019 12:12 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

  • बाबूलाल गौर का बुधवार सुबह भोपाल के निजी अस्पताल में 89 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया।
  • अपने जीवन यापन के लिए उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से गौर मध्यप्रदेश की ओर रुख किया था। 
  • बाबूलाल का भाजपा के बड़े नेता के रूप में मध्यप्रदेश की राजनीति में प्रमुख स्थान रहा है। 
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बाबूलाल गौर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का बुधवार सुबह भोपाल के निजी अस्पताल में 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। गौर का राजनीतिक सफर दिलचस्प भरा रहा है। अपने जीवन यापन के लिए उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से गौर ने मध्यप्रदेश की ओर रुख किया था। बाबूलाल का भाजपा के बड़े नेता के रूप में मध्यप्रदेश की राजनीति में प्रमुख स्थान रहा है। 

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बाबूलाल गौर का जन्म उत्तर प्रदेश के नौगीर गांव में दो जून, 1930 में हुआ था। गौर के पिता राम प्रसाद यादव भी पहलवान थे। बाबूलाल का असली नाम बाबूराम यादव था। स्कूल की एक घटना के बाद उनका नाम बाबूलाल गौर पड़ गया। दरअसल उनकी कक्षा में दो बाबूराम यादव और भी थे। तो जब भी टीचर किसी बाबूराम को बुलाती थी तो सबको दुविधा होने लगती थी।

तब उनकी टीचर ने कहा कि जो भी उनकी बात को गौर से सुनेगा वो उसका नाम बाबूराम गौर रख देंगी। तब उन्होंने टीचर के सवाल का सही जवाब दिया और उनका नाम बाबूराम यादव से बाबूलाल गौर पड़ गया। इसके बाद जब बाबूराम भोपाल गए तो लोगों ने उन्हें बाबूलाल गौर कहना शुरू कर दिया। तब से उनका नाम बाबूलाल गौर पड़ गया।
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कैसे शुरू हुआ राजनीतिक सफर?

बाबूलाल उस वक्त 16 साल के थे, जब उन्होंने संघ की शाखाओं में जाना शुरू किया। वह साल 1946 से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए। इसके बाद वह दिल्ली, पंजाब आदि राज्यों में आयोजित होने वाले संघ के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे। उन्होंने आपातकाल के दौरान 19 माह की जेल भी काटी थी।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर काम

बाबूलाल पहली बार 1974 में भोपाल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में निर्दलीय विधायक चुने गए थे। वह 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। आपातकाल के बाद 1977 में उन्होंने विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और 2018 तक लगातार आठ बार विधानसभा में रहे। वह बीमारी के चलते 2018 में विधानसभा की चुनाव नहीं लड़ पाए। 
 

अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा

1993 के विधानसभा चुनाव में बाबूलाल गौर ने सबसे अधिक वोटों से जीत पाई थी। इसके बाद 2003 के विधानसभा चुनाव में 64 हजार, 212 मतों के अंतर से जीतकर उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। वह अपने जीवनकाल में मध्यप्रदेश के स्थानीय शासन, विधि एवं विधायी कार्य, संसदीय कार्य, जनसंपर्क, नगरीय कल्याण, शहरी आवास तथा पुनर्वास एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री रहे थे। इसके अलावा वह सितंबर 2002 से 2003 तक मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे थे।

शराब की कंपनी से नेता बनने तक

बाबूलाल शुरुआत में शराब की कंपनी में नौकरी करते थे, लेकिन संघ में सक्रिय रहने के कारण उन्होंने कपड़े की मिल में काम करना शुरू कर दिया। वह इस दौरान ट्रेड यूनियन की गतिविधियों में भी शामिल रहे थे। हालांकि 1956 में पार्षद का चुनाव लड़ने पर वह हार गए थे। फिर 1972 में उन्हें संघ की ओर से विधानसभा का टिकट मिला। 

कैसे पहली बार विधानसभा पहुंचे?

बाबूलाल अपना पहला चुनाव हार गए थे। जिसके खिलाफ उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की। उनके याचिका जीतने के बाद 1974 में एक बार फिर उपचुनाव कराए गए, जिसमें उन्हें जीत मिली। वह इस तरह पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कभी पलटकर नहीं देखा और सत्ता के मुकाम पर चढ़ते गए।

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