फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Khargone News: बारिश का लंबा ब्रेक बना चिंता की वजह, खेतों से घट रही नमी; खरीफ फसलों पर बढ़ा संकट

Fri, 17 Jul 2026 04:44 PM IST
खरगोन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन

सार

खरगोन में 10 दिन से बारिश नहीं होने और तेज हवाओं से खेतों की नमी घट रही है, जिससे सोयाबीन, मक्का सहित खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। कृषि वैज्ञानिकों ने नमी बचाने के लिए खेत की पपड़ी तोड़ने और पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करने की सलाह दी है। 
विज्ञापन
बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी खत्म होने लगी है। - फोटो : (फाइल फोटो)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

खरगोन जिले में मानसून की शुरुआत भले ही उम्मीदों के साथ हुई थी और शुरुआती बारिश से किसानों ने सोयाबीन, मक्का सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई पूरी कर ली थी, लेकिन पिछले करीब 10 दिन से बारिश पूरी तरह थमी हुई है। लगातार चल रही तेज हवाओं के कारण खेतों की मिट्टी की नमी तेजी से कम हो रही है। इससे फसलों की बढ़वार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है और किसान अब अगली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

विज्ञापन


ग्रामीण क्षेत्रों में किसान इन दिनों खेतों में खरपतवार नियंत्रण के कार्य में जुटे हैं। कई स्थानों पर खरपतवार तेजी से बढ़ने के कारण किसान रासायनिक खरपतवारनाशक दवाओं का उपयोग कर रहे हैं, जबकि कुछ किसान परंपरागत तरीके से निंदाई-गुड़ाई भी करवा रहे हैं। हालांकि दवाओं के बढ़ते उपयोग से खेतिहर मजदूरों को पहले की तुलना में कम काम मिल रहा है, जिससे ग्रामीण मजदूरी पर भी असर देखा जा रहा है।

ये भी पढ़ें- भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में पांच अगस्त को होगी अंतिम सुनवाई, नमाज के वैकल्पिक स्थान पर देनी होगी जानकारी
विज्ञापन


किसान गिरधारी राठौड़, सौभाग गेहलोत, दीपक कुशवाह और विजय का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि लगातार चल रही हवा मिट्टी की नमी को तेजी से खत्म कर रही है, जिससे फसलों में तनाव दिखाई देने लगा है। किसानों का मानना है कि समय पर बारिश होना अब बेहद जरूरी हो गया है।
विज्ञापन


कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी ने किसानों को सलाह दी है कि यदि उनके क्षेत्र में 8 से 10 दिनों से बारिश नहीं हुई है तो खेत की ऊपरी पपड़ी को खुरपी, विल या कोलपा-डोरा चलाकर तोड़ दें। इससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी और उसका वाष्पीकरण कम होगा। इसके अलावा 10 ग्राम पोटेशियम नाइट्रेट प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इससे पौधों को सूखे की स्थिति में राहत मिलती है और उनकी बढ़वार प्रभावित होने की संभावना कम रहती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि ये उपाय अपनाकर सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों को 8 से 10 दिन तक सूखे की स्थिति से बचाया जा सकता है। किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखते हुए वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल प्रबंधन करने की भी सलाह दी गई है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें