मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप है। यहां पारा 45 डिग्री के पार चल रहा है, तो वहीं शनिवार से रोहिणी नक्षत्र जिसे नौतपा भी कहते हैं, वह शुरू हो गया है। और माना जाता है कि नौतपा अपने साथ भीषण गर्मी लेकर आता है। ऐसे में गर्मी के चलते आम आदमी के साथ ही पशु पक्षियों का भी हाल बेहाल है। आसमान से परिंदे भी गर्मी के चलते अब नीचे गिरकर दम तोड़ रहे हैं।
प्रदेश के खरगोन जिले के एक कब्रिस्तान क्षेत्र के पेड़ों के आसपास अक्सर दिखाई देने वाले बगुलों में से 13 बगुले आसमान से गिरकर जमीन पर पड़े हुए मिले हैं। हालांकि, इनमें से चार अधमरे बगुलों को बचा लिया गया, तो वहीं नौ की मौत हो गई। कहा जाता है कि निमाड़ में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ती है, और इस समय भी निमाड़ में आसमान से आग बरस रही है। वहीं, आज से रोहिणी नक्षत्र भी शुरू हो चुका है। रोहिणी नक्षत्र को नौतपा भी कहा जाता है और आज ही आसमान से गर्मी की शिद्दत के कारण बगुले जमीन पर गिर कर मरे हुए पाए गए हैं।
खरगोन रोड के कब्रिस्तान क्षेत्र में लगभग एक दर्जन से अधिक बगुले गर्मी की शिद्दत से मरे हुए मिले हैं। जबकि कब्रिस्तान की देखरेख करने वाले यहां पर परिंदों के लिए पानी की व्यवस्था भी करते हैं। इधर, बाजार में खेती किसानी की खरीदी करने वाले लोग भी गर्मी से बचते हुए खरीदी कर रहे हैं। हर कोई गर्मी से बचने के लिए अपने आप को कपड़ों से ढक रहा है। मोबाइल पर दोपहर 1 बजे तापमान 45 डिग्री था। एसी कुलर भी जवाब दे गए हैं। गर्मी की शिद्दत को देखते हुए कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जो समझाइश दी गई है, उसका पालन करें।
कल से गिर रहे बगुले, अब तक 13 मिले
खरगोन के कब्रिस्तान में साफ सफाई और चौकीदार का काम करने वाली महिला मुबीना शाह ने बताया कि ये बगुले कल से यहां गिरने शुरू हुए थे। और आज जब हम यहां आए थे, तब हमें कुल तेरह बगुले यहां पड़े हुए मिले थे, जिनमें से नौ तो पूरी तरह से मरे हुए थे, और चार अधमरे थे। जिन्हें हमने पानी वगैरह पिला-खिला कर ठीक किया, और फिर थोड़ी देर में जो बगुले जिंदा थे वो ठीक होकर वह उड़ गए।
गर्मी से बचाव के लिए देसी पेय का करें इस्तेमाल
वहीं, जिला कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने कहा कि निमाड़ क्षेत्र पूरे में ही ज्यादा गर्मी होती है, और खरगोन में भी अच्छी गर्मी चल रही है। यहां 44 डिग्री के आसपास तापमान रहता है, तो हमने स्वास्थ्य विभाग के जरिए भी एडवाइजरी जारी की है, और अभी भी हम यही आह्वान करना चाहते हैं कि धूप से बचाव के जितने भी साधन है वह करें। और हमने डिटेल में एडवाइजरी में बताया है कि कैसे डिहाइड्रेशन हो तो उसे बचना है, छांव में रहना है, सिर पर कपड़ा या गमछा ढककर चले, पानी ज्यादा पिए, ग्लूकोज या इलेक्ट्रॉल पाउडर का इस्तेमाल करें, और यह सब जो चल रहा है जो देसी पीने के साधन हैं। जैसे पना है, या अन्य जो भी पीने की चीजे हैं सब इस्तेमाल करें, और गर्मी से बचते रहें।