अपने बयानों से सुर्खियों में बने रहने वाले मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉक्टर कुंवर विजय शाह ने इस बार प्रदेश के आदिवासियों के लिए बड़ी सौगात मांगी है। उन्होंने आदिवासी बटालियन बनाने की मांग की है।
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने खंडवा नगर में मीडिया के सामने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि वे प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जल्द ही इस तरह का प्रस्ताव देने जा रहे हैं, जिसमें उन्होंने प्रदेश में विलुप्त होती जा रही जनजातियों जिनमे सहरिया, बैगा और भारिया हैं, उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की बात कही है। उन्होंने बताया कि उनके प्रस्ताव में है कि इनको लेकर एक बटालियन बनाई जाए, जिस तरह से सिख समाज की बटालियन बनी हुई है। इसके जरिए प्रदेश में विलुप्त होती जनजातियों को रोजगार और मुख्य धारा से भी जोड़ा जा सकेगा।
प्रदेश के खंडवा जिले की हरसूद विधानसभा से विधायक और काबीना मंत्री विजय शाह ने मीडिया से बात करते हुए बताया है कि आने वाले समय में प्रदेश में आदिवासी बटालियन बनाई जाएगी। जैसे अन्य बटालियन बनी हुई हैं। उन्होंने इस दौरान सिख बटालियन का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि उसी तरह ही आदिवासी बटालियन का भी गठन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आदिवासियों की 46 जातियां हैं। उसमें से तीन जातियां सहरिया, बैगा और भारिया ऐसी जनजाती हैं जो विलुप्त होती जा रही हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री जी ने 25 करोड़ रुपया भी दिया है। हालांकि मंत्री शाह ने इस सबकी रूपरेखा फिलहाल न बताते हुए कहा कि इस सबको लेकर अलग से विस्तार से बताया जाएगा कि हम आदिवासियों के लिए क्या कर रहे हैं।
आदिवासी जनजातियां हो रही हैं विलुप्त
इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने कहा कि आदिवासियों की बटालियन बने, उसके लिए भी उन्होंने प्रस्ताव मुख्यमंत्री जी को दिया है। जैसे सिख बटालियन हुआ करती थी। ऐसे ही सहरिया, बैगा और भारिया के लिए वे चाहते हैं कि एक बटालियन बने। ताकि उन्हें जॉब मिल सके और वह मुख्य धारा से भी जुड़ सकें, क्योंकि वह ऐसे लोग हैं जो विलुप्त होते जा रहे हैं। उनको जीवन में आगे बढ़ाने के लिए सब जरूरी है।
मंत्री शाह को मिलता रहा है आदिवासी समाज का साथ
बता दें कि कैबिनेट मंत्री विजय शाह जिस क्षेत्र से आते हैं, वह आदिवासी बहुलता वाला क्षेत्र है, और उस क्षेत्र के आसपास का आदिवासी समाज मंत्री शाह को भारी बहुमत से जीत दिलाता रहा है। तो वहीं मंत्री शाह भी आदिवासी समाज के उत्थान के लिए और उसे समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए नई नई योजनाएं बनाकर उस पर क्रियान्वयन करवाने में लगे रहते हैं, जिसके चलते ही उन्हें चुनाव में भी इसका फायदा मिलता रहा है।