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MP Board Result 2026: जिसे ‘मेरिट’ का मतलब भी नहीं पता था, वही बनी टॉपर; जानिए आनंदी की चौंकाने वाली कहानी

Wed, 15 Apr 2026 05:20 PM IST
खंडवा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा

सार

MP Board Result 2026: मध्यप्रदेश के खंडवा की छात्रा आनंदी गंगराड़े ने कक्षा 12वीं गणित संकाय में 97% अंक हासिल कर प्रदेश में छठी रैंक प्राप्त की। साधारण परिवार से आने वाली आनंदी को मेरिट का अर्थ भी नहीं पता था, लेकिन दृढ़ संकल्प और 8–9 घंटे की नियमित पढ़ाई ने उन्हें प्रदेश की प्रावीण्य सूची में स्थान दिलाया। 
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आनंदी गंगराड़े - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में एमपी बोर्ड के नतीजे सामने आते ही छात्रों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। वहीं प्रदेश के खंडवा की 4 बेटियां कक्षा 12वीं में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में जगह बनाने में कामयाब हुई हैं। इनमें से 3 बेटियां गणित समूह में छठी, सातवीं और दसवीं रैंक लाई हैं, तो वहीं जीव विज्ञान समूह में भी एक बालिका प्रदेश में दसवीं रैंक लाई है।

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सीए बनना चाहती हैं आनंदी
इसी बीच गणित समूह से प्रदेश में छठी रैंक लाने वाली आनंदी गंगराड़े, पिता आशीष गंगराड़े, जिन्होंने 500 में से 485 अंक लाकर 97% हासिल किए हैं, उन्होंने मीडिया से चर्चा में बताया कि वे सीए बनना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद तो थी कि अच्छे अंक आएंगे, लेकिन यह नहीं मालूम था कि इतने अच्छे अंक आएंगे।

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पापड़ बेचने का काम करते हैं पिता
मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाली आनंदी के पिता जिले के पंधाना ब्लॉक में पापड़ बेचने का काम करते हैं। आनंदी के अनुसार, उन्हें परिवार से काफी सहयोग मिला है। उन्होंने अपनी इस बड़ी सफलता का राज बताते हुए कहा कि कोई भी विद्यार्थी जो लगातार मेहनत करता है, वह इस तरह से सफलता प्राप्त कर सकता है। इस दौरान वे सोशल मीडिया और मोबाइल के उपयोग से भी बचती थीं, जिससे उन्हें पढ़ाई पर फोकस करने का पूरा समय मिलता था।

मेरिट का मतलब भी नहीं पता था
यही नहीं, मीडिया से आगे चर्चा में आनंदी ने बताया कि शुरुआत में उनका ऐसा कोई लक्ष्य नहीं था कि उन्हें मेरिट लाना ही है। बल्कि उन्हें तो मेरिट का मतलब भी नहीं पता था। लेकिन उनके शिक्षकों ने उन्हें बताया कि मेरिट क्या होता है और उन्हें मेरिट लाना है। इसके लिए लगातार मेहनत करते हुए तैयारी करनी होगी।
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8 से 9 घंटे तक पढ़ाई करती थी आनंदी
वहीं उनके माता-पिता ने बताया कि आनंदी दिन भर में करीब 8 से 9 घंटे तक पढ़ाई करती थी, जिससे आज उसे यह सफलता मिली है। उन्होंने उससे घर का काम नहीं कराया, बल्कि उसे पढ़ाई में मन लगाकर अच्छा करने के लिए प्रेरित किया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

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