कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान सरकार के कोरोना संबंधी पाबंदियों को हटाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। कमलनाथ ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। सरकार ने जनता को अब भगवान भरोसे छोड़ दिया है। सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है।
दरअसल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कोरोना को लेकर समीक्षा बैठक ली थी। इसके बाद उन्होंने राज्य से कोरोना को लेकर लागू की गई सभी पाबंदियों को हटाने का ऐलान कर दिया। इस पर टिप्पणी करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को एकदम से तमाम प्रतिबंध हटाने के बजाय धीरे-धीरे, चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में छूट देनी चाहिए थी। क्या सरकार ने इस निर्णय को लेने से पहले कोरोना गाइडलाइन का पालन करवाने की संपूर्ण व्यवस्था कर ली है? सरकार के इस निर्णय के बाद यदि संक्रमण बढ़ता है, जनहानि होती है तो क्या राज्य सरकार उसकी जिम्मेदारी लेगी?
भाजपा के लिए तो प्रतिबंध थे भी नहीं
कमलनाथ ने कहा कि कोरोना महामारी से जुड़े प्रतिबंध हटाने का कोई औचित्य नहीं है। भाजपा के लिए तो यह प्रतिबंध कोई मायने रखते ही नहीं थे। अब भाजपा ने पिछले दिनों जंबूरी मैदान के मेगा आयोजन के बाद मध्यप्रदेश की आम जनता के लिए तमाम प्रतिबंध हटा लिए हैं। ऐसा लग रहा है कि शिवराज सरकार ने जल्दबाजी में यह निर्णय लिया है।
तीसरी लहर की आशंका के बीच निर्णय
कमलनाथ ने कहा कि ऐसे समय जब देश में 1,28,455 एक्टिव केस हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 10 हजार से अधिक केस सामने आए हैं। तीसरी लहर को लेकर दुनियाभर में आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अभी तक वैक्सीन लगी नही हैं। कई पात्र लोगों का अभी तक वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। तब यह निर्णय लिया गया है।