शहर के मुख्य हनुमान चौराहे पर लगे दो विशालकाय होर्डिंग इस मुकाबले की मानो पूरी कहानी कह रहे हैं। एक में कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया मुस्करा रहे हैं तो दूसरे में भाजपा के गुना-शिवपुरी सीट से प्रत्याशी जयभान सिंह पवैया और नरेंद्र मोदी दिख रहे हैं।
दोनों की साइज और ऊंचाई एक जैसे हैं। इलाके में महाराज के नाम से विख्यात ज्योतिरादित्य और भाजपा में इस बार मुकाबला बराबरी का है।
इस सीट से कभी हारे नहीं सिंधिया
इस सीट से सिंधिया परिवार का कोई सदस्य कभी हारा नहीं है। 1957 से यह सीट ज्यादातर सिंधिया परिवार के पास ही रही है। 2002 में ज्योतिरादित्य पहली बार इस सीट से लड़े थे। तभी से वह लगातार यहां से चार बार जीत चुके हैं।
1999 में उनके पिता माधव राव सिंधिया इस सीट से दो लाख से अधिक वोटों से जीते थे। लेकिन इस बार ज्योतिरादित्य जीतते हैं तो भी वोटों का अंतर ज्यादा नहीं होगा।
इस बार मुकाबला कड़ा है। उनके सामने वही जयभान सिंह पवैया हैं जिनकी वजह से उनके पिता माधव राव सिंधिया ने ग्वालियर सीट छोड़ गुना से लड़ना शुरू किया।
‘राजपुत्र और किसान पुत्र आमने सामने'
बताते हैं कि 1999 में ग्वालियर सीट पर माधव राव का सामना जयभान सिंह पवैया से था और जीत का अंतर बेहद कम यानी 25000 रहा था। इसके बाद ही माधवराव ने सीट बदल ली।
जहां तक जयभान सिंह पवैया की बात है तो वे विनय कटियार के बाद बजरंग दल के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और फिलहाल ग्वालियर विधानसभा सीट से विधायक हैं। स्थानीय लोगों के हिसाब से कहें तो ‘राजपुत्र’ और ‘किसान पुत्र’ आमने सामने हैं।
हार्वर्ड और स्टैनफर्ड में पढ़े कांग्रेस प्रत्याशी किसानों को बारिश से नुकसान जैसे स्थानीय मुद्दे उठाते नजर आते हैं तो पवैया सीधी बात कहते हैं कि मेरी लड़ाई सामंतवाद से है।
जनता महसूस कर रही है बदलाव की आहट
ग्वालियर से गुना जाने वाले नेशनल हाइवे पर शिवपुरी के निकट ढाबा चलाने वाले इंद्रभान यादव भी बदलाव की आहट को महसूस कर रहे हैं। इंद्रभान कहते हैं कि इस बार तो मोदी की हवा है।
बसपा के लाखन सिंह बघेल भी कांग्रेस के वोट काट रहे हैं। इसके अलावा वीरेंद्र रघुवंशी के कांग्रेस छोड़ने का भी फर्क पड़ रहा है। वहीं गुना से पहले पाटई कस्बे में बुजुर्ग ग्यारसी लाल जैन कहते हैं कि वक्त चाहे जितना बदले हम तो महाराज को ही वोट देंगे। हम उनकी प्रजा जो हैं।
इस बात को काटते हुए उनके बेरोजगार भतीजे संतोष जैन कहते हैं कि आप गुना और शिवपुरी की हालत देख लीजिए। क्या ये दोनों कस्बे वाकई शहर कहलाने लायक हैं। ठीक है माधव राव सिंधिया यहां नेशनल फर्टिलाइजर्स का कारखाना लाए पर वो तो पुरानी बात हो गई अब नौकरियां कहां हैं?
क्या कहता है युवा वर्ग
इस सीट पर 15 फीसदी यूथ वोटर हैं, जो पहली बार मतदान करेंगे। बीकॉम की छात्रा आकांक्षा और बीएससी की छात्रा शालू का कहना है कि हमारा ग्रुप तो मोदी को वोट करेगा। हमें मजबूत प्रधानमंत्री चाहिए।
प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे अतुल जैन कहते हैं कि मुझे तो भाजपा की लहर लगती है। विकास भी बड़ा मुद्दा है। ग्रीन रेस्तरां के बाहर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव शशि रंजन कहते हैं भोपाल से यहां आने में हमें दस घंटे तक लग जाते हैं। ऐसे में हम किसे दोष दें।
सिंधिया के लिए एकजुट हुआ महल
शायद यह मुश्किल होते हालात ही हैं कि पूरा सिंधिया परिवार प्रचार अभियान में जुटा हुआ है। ज्योतिरादित्य के बेटे महाआर्यमन भी प्रचार में जुटे हैं। दरअसल ज्योतिरादित्य की बुआ और शिवपुरी सीट से विधायक यशोधरा राजे का भी उन्हें पूरा साथ मिल रहा है।
बताते हैं विधानसभा चुनाव में भाजपा की यशोधरा की ज्योतिरादित्य ने इस कदर मदद की थी कि कांग्रेस प्रत्याशी नाराज हो गए थे। इस बार बारी बुआ की ओर से मदद की है। ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे भी 40 डिग्री तापमान में जमकर चुनाव प्रचार कर रही हैं।