पुणे हादसे से लोग अब भी आक्रोशित हैं
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पुणे पोर्श कार हादसे में मध्य प्रदेश के इंजीनियर अनीस अवधिया और इंजीनियर अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई थी। शहर की युवा महिला इंजीनियर की मौत से रोष व आक्रोश व्याप्त है। जबलपुर के सामाजिक व छात्र संगठन पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की आवाज बुलंद कर रहे हैं।
इन संगठनों का कहना है कि नशे में धुत होकर कार से टक्कर मारकर शहर की प्रतिभाशाली बेटी की हत्या की गई है। आरोपी मानसिक रूप से वयस्क था और सिर्फ चार माह उम्र कम होने के आधार पर उसे नाबालिग नहीं माना जा सकता है।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय छात्र परिषद के अध्यक्ष अधिवक्ता धीरज ठाकुर का कहना है कि ऐसे हादसों से शहर के लोगों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है। वे अपने युवा व प्रतिभावान बच्चों को बड़े शहरों में नौकरी के लिए नहीं भेजेंगे। दोनों पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए, इसलिए हम शीघ्र ही जस्टिस फॉर अश्विनी-अनीस कैंपेन प्रारंभ करेंगे।
भारत कृषक समाज के पदाधिकारी केके अग्रवाल ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि हम सभी पीड़ित परिवार के साथ हैं। उन्हें न्याय मिलना चाहिए और न्याय की लड़ाई में हम उनके साथ हैं। पूरी घटना में उनकी कोई गलती नहीं थी। नशे में धुत होकर गाड़ी चलाने वाले को सख्त सजा मिलनी चाहिए। नाबालिग होने का उसे कोई फायदा नहीं मिलना चाहिए।
यूथ फेडरेशरन के अध्यक्ष जमा खान का कहना है कि आरोपी नाबालिग है तो पब में जाकर शराब कैसे पी? कार कैसे चला रहा था? इससे स्पष्ट है कि वह मानसिक रूप से वयस्क था। दुर्घटना गलती से घटित होती है, इस पूरे मामले में अपनी जान गंवाने वालों की गलती सिर्फ इतनी थी कि वे मोटर साइकिल पर सवार होकर सड़क पर चल रहे थे। हमारा संगठन पीड़ित परिवार के साथ है और आरोपी को बालिग मानकर उसके खिलाफ प्रकरण चलाया जाना चाहिए। पूरे मामले को क्रूरता के साथ की गई हत्या के रूप में देखना चाहिए।