मध्य प्रदेश के पन्ना में हुए जनपद उपाध्यक्ष के चुनाव का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा है। कलेक्टर ने हाईकोर्ट में उपस्थित होकर अपना जवाब रखा है। बता दें कि जनपद उपाध्यक्ष पद के पराजित प्रत्याशी ने तत्काल चुनाव याचिका दायर की थी। कलेक्टर ने भी चुनाव याचिका की सुनवाई करते हुए उसे विजयी घोषित कर दिया। जिसके खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर को तलब किया था। बुधवार को पन्ना कलेक्टर ने अपना जवाब कोर्ट के सामने रखा है।
बता दें कि पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्रा ने जवाब पेश करते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति से मुक्त करने आवेदन दिया है। एकलपीठ ने आवेदन पर फैसला सुरक्षित रखते हुए याचिका पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धारित की है।
गौरतलब है कि पन्ना निवासी याचिकाकर्ता परमानंद शर्मा की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उन्होंने जनपद पंचायत गुन्नौर के उपाध्यक्ष के लिए नामांकन दायर किया था। उपाध्यक्ष पद के लिए 27 जुलाई को हुए चुनाव में निर्वाचित 25 सदस्यों में से 13 सदस्यों ने वोट दिए थे और वे विजयी निर्वाचित हुए थे। उपाध्यक्ष निर्वाचित होने का सर्टिफिकेट भी उन्हें प्रदान कर दिया गया था। चुनाव की प्रक्रिया होने के बाद सभी सदस्य वापस घर लौट आए थे।
बताया गया कि उसी शाम 4.30 बजे पराजित प्रत्याशी रामशिरोमणी ने जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर संजय कुमार मिश्रा के समक्ष धारा 122 के तहत चुनाव याचिका दायर कर दी। जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर ने तत्काल चुनाव याचिका की सुनवाई करते हुए शाम लगभग 7 बजे पराजित प्रत्याशी को विजयी घोषित कर सर्टिफिकेट जारी कर दिया। कलेक्टर ने विजयी होने के बावजूद भी उन्हें पक्ष रखने का अवसर प्रदान नहीं दिया, जो प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है।
पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किए थे कि कलेक्टर का आचरण चुनाव आयोग के जिला निर्वाचन अधिकारी की तरह नहीं था। उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के एजेंट के रूप में कार्य किया और पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर तक प्रदान नहीं किया। उन्होंने तत्काल सुनवाई करते हुए एकपक्षीय निर्णय पारित कर दिया। एकलपीठ ने जिला कलेक्टर को अनावेदक बनाने के निर्देष जारी करते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा उपस्थित हुए।