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MP News: सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत के लिए बुलाया, मध्यप्रदेश में वकीलों की हड़ताल खत्म, कल से काम पर लौटेंगे

Tue, 28 Mar 2023 07:09 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्यप्रदेश में हड़ताल कर रहे वकील बुधवार से काम पर लौटेंगे। पिछले छह दिन से पूरे प्रदेश में वकीलों ने हड़ताल कर रखी थी। विवाद 25 लंबित प्रकरणों के तीन महीने में निराकरण को लेकर था, जिसे अव्यवहारिक बताते हुए वकील हड़ताल पर थे।  
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जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में वकीलों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के बीच बना गतिरोध खत्म हो गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने मध्य प्रदेश अधिवक्ता परिषद के पदाधिकारियों को बातचीत के लिए बुलाया है। इस बातचीत से सकारात्मक नतीजा निकलने की उम्मीद में परिषद ने विशेष बैठक बुलाई और हड़ताल खत्म करने का फैसला किया। साथ ही सदस्य वकीलों को कहा है कि बुधवार यानी 29 मार्च से सभी काम पर लौटें। 

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विवाद जिला पंचायतों में लंबित 25 प्रकरणों को तीन महीने की समयसीमा में निपटाने को लेकर था। इस आदेश के खिलाफ प्रदेश के कई जिला न्यायालयों में वकील प्रतिवाद दिवस मना रहे थे। मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद ने 23 मार्च से पूरे प्रदेश में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ प्रतिवाद दिवस मनाने का आग्रह किया था। हाईकोर्ट ने 24 मार्च को संज्ञान याचिका की सुनवाई करते हुए वकीलों को तत्काल कार्य पर लौटने के आदेश जारी किए थे। हाईकोर्ट ने राज्य अधिवक्ता परिषद सहित अन्य अधिवक्ता एसोसिएशन को नोटिस जारी करते हुए आदेश में कहा था कि कार्य पर नहीं लौटने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी एसबीसी के आह्वान पर प्रदेश भर के वकील न्यायिक कार्य में भाग नहीं ले रहे थे। इस वजह से सिर्फ हाईकोर्ट ही नहीं बल्कि प्रदेश की किसी भी अदालत में काम नहीं हो रहा था। हड़ताल में स्टेट बार एसोसिएशन भी शामिल था। वकीलों की दलील थी कि यदि पुराने प्रकरणों को प्राथमिकता दी तो नए केस लंबित हो जाएंगे। पहली बार के अपराधियों की जमानत याचिका भी निचली अदालतों से निरस्त हो जाती है। इस वजह से हाईकोर्ट पर प्रकरणों का दबाव बढ़ता है।  

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने राज्य अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों को बुधवार दोपहर दो बजे इस मुददे पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। इसके बाद राज्य अधिवक्ता परिषद ने सभी अधिवक्ताओं को बुधवार से न्यायालय में पैरवी के लिए उपस्थित होने का आग्रह किया है। एसबीसी के उपाध्यक्ष आरके सैनी ने कहा कि तीन माह की सीमा में प्रकरणों का निपटारा तो हो जाएगा लेकिन पक्षकार को न्याय नहीं मिलेगा। न्याय की प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन होना चाहिए। तीन माह में लभगग 15 दिन अवकाश के होगे। इस निर्णय से अधिवक्ताओं पर अत्याधिक दबाव रहेगा।

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