हाईकोर्ट में वकील ने जमकर हंगामा किया।
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पुलिस बल ने आक्रोशित अधिवक्ताओं को चीफ जस्टिस कोर्ट से हटाया तो वह परिसर में स्थित हनुमान मंदिर के सामने शव रखकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद उन्होंने राज्य अधिवक्ता परिषद के बिल्डिंग में स्थित वरिष्ठ अधिवकता मनीष दत्त के ऑफिस में आग लगा दी। इस दौरान उनकी पुलिस कर्मियों से झड़प भी हुई। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने हल्का बल भी प्रयोग करना पड़ा।
शनिवार को नहीं होगा काम
अधिवक्ता द्वारा प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या किए जाने के मामले में स्टेट बार काउसिल ने शनिवार को पूरे प्रदेश में प्रतिवाद दिवस मनाते हुए अधिवक्ताओं से न्यायिक कार्य से विरत रहने का आव्हान किया है। राज्य अधिवक्ता परिषद के उपाध्यक्ष आर के सिंह सैनी ने बताया कि कुछ अधिवक्ताओं व अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर अधिवक्ता अनुराग साहू ने आत्महत्या की है। उन्होंने हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज की घटना का निंदा की है। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज में कई अधिवक्ताओं को चोट आई है। पुलिस बर्बरता पर उनके खिलाफ कार्रवाई के संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा।
इधर पुलिस अधीक्षक सिध्दार्थ बहुगुणा ने बताया कि आक्रोशित अधिवक्ताओं ने आगजनी तथा पुलिस के साथ झूमाझटकी की। स्थिति को नियंत्रित करने पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित है।
सुप्रीम कोर्ट कई मर्तबा दे चुका है नसीहत
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार नहीं बल्कि कई बार हाईकोर्ट और निचली अदालतों के जजों को अनावश्यक टिप्पणियों से बचने की नसीहत दी है। पिछले साल कोरोना से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एल नागेश्वर राव, एस. रवींद्र भट की बेंच ने कहा था कि उच्च न्यायालयों के जजों को सुनवाई के दौरान अनावश्यक और बिना सोचे-समझे टिप्पणी करने से बचना चाहिए। क्योंकि वे जो कहते हैं, उनके काफी गंभीर प्रभाव हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जजों को अपनी बात सोच-विचार करके ही कहनी चाहिए। जब हम उच्च न्यायालय के किसी फैसले की आलोचना कर रहे होते हैं, तब भी हम हमारे दिल में क्या है, यह नहीं कहते। संयम बरतते हैं। हम उम्मीद करेंगे कि इन मुद्दों से निपटने के लिए उच्च न्यायालयों को स्वतंत्रता दी गई है। दरअसल, कोरोना मामले में सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि कोरोना की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग सबसे अधिक जिम्मेदार है। उसके अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। इसी तरह से दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों पर सख्त टिप्पणियां की थीं।