मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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मेडिकल पीजी कोर्स करने के बाद तीन माह में नियुक्ति देना थी। तीन माह की बजाय 6 साल का समय गुजर गया है, परंतु नियुक्ति नहीं दी गई। बांड भरने के कारण उसके शिक्षा संबंधित दस्तावेज भी नहीं लौटाए जा रहे है। डॉक्टर की याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
डॉ. भीमराव रूप सिंह पवार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसने इन सर्विस कैटेगरी में पीजी मेडिकल कोर्स में दाखिला लिया था। पीजी मेडिकल कोर्स में दाखिले के दौरान दस लाख रुपये का एक बांड भरवाया गया था। बांड की शर्त अनुसार कोर्स पूरा करने के बाद उसे एक साल तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं देने थीं। उसने पीसीजी कोर्स अप्रैल 2017 में उत्तीर्ण कर लिया था।
याचिका में कहा गया था कि कोर्स उत्तीर्ण करने के तीन माह की समय अवधि में उसे नियुक्ति प्रदान करनी थी। तीन माह की बजाय 6 साल से अधिक का समय गुजर गया है, परंतु अभी तक उसे नियुक्ति प्रदान नहीं की गई है। कॉलेज में उसकी मार्कशीट सहित अन्य दस्तावेज हैं, जो वापस नहीं लौटाए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि शिक्षा संबंधित दस्तावेज छात्र की पूंजी होती है। निर्धारित समय अवधि में नियुक्ति नहीं देना शासन की गलती है। अभ्यावेदन देने के बावजूद भी याचिकाकर्ता के दस्तावेज नहीं लौटाए जा रहे हैं। याचिका में प्रमुख सचिव, संचालक व आयुक्त चिकित्सा शिक्षा विभाग को अनावेदक बनाया गया था।