जबलपुर के शिवनगर स्थित न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में अग्निकांड मामले में गुरुवार को सरकार की तरफ से कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई। इसमें चौंकाने वाले फैक्ट पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। साथ ही मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द करने की चेतावनी भी दी है।
बता दें कि जबलपुर के लाइफ मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में हुए अग्निकांड में आठ व्यक्तियों की मौत हो गई थी। गुरुवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने पाया कि उक्त अस्पताल को लायसेंस जारी करने से पहले निरीक्षण के लिए बनी तीन सदस्यीय डॉक्टरों की टीम को निलंबित करने की अनुशंसा की गई है। इसके बावजूद शहर के निजी अस्पतालों को निरीक्षण के लिए नियुक्त 41 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम में उन्हें शामिल गया है। जिस पर युगलपीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना निदंनीय है। युगलपीठ ने जांच सीबीआई को सौंपने की चेतावनी भी दी।
बता दें कि लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर में नियम विरुद्ध तरीके से प्राइवेट अस्पताल को संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। कोरोना काल में गत तीन साल में 65 निजी अस्पतालों को संचालन की अनुमति दी गई है। जिन अस्पतालों को अनुमति दी गई है, उनमें नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी के नियमों का पालन नहीं किया गया है। जमीन के उपयोग का उद्देश्य दूसरा होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति दी गई है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र नहीं होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है।
याचिका में कहा गया था कि भौतिक सत्यापन किए बिना अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। अस्पतालों के मेडिकल व पैरामेडिकल सहित अन्य स्टाफ की जांच तक नहीं की गई है। याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के मामले में सरकार की तरफ से कार्रवाई रिपोर्ट पेश की गई। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि उक्त अस्पताल का निरीक्षण डॉ. एलएन पटेल, डॉ. निषेध पटेल तथा डॉ. कमलेश वर्मा द्वारा किया गया था। उनकी निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल संचालन का लायसेंस जारी किया गया था। गलत निरीक्षण रिपोर्ट देने के कारण तीनों डॉक्टर के खिलाफ निलंबन कार्रवाई का उल्लेख पेश रिपोर्ट में किया गया है।
कार्रवाई रिपोर्ट में बताया गया है कि शहर के सभी निजी अस्पतालों की जांच के लिए 41 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम का गठन किया गया था। जिन्हें निजी अस्पतालों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देना था। उस टीम में वे तीन डॉक्टर भी शामिल थे, निलंबित किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
जिसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने पांच मिनट में तीनों डॉक्टरों के निलंबन आदेष पेश करने शासकीय अधिवक्ता को निर्देशित किया। सरकारी अधिवक्ता द्वारा निलंबन आदेश पेश नहीं कर पाने पर युगलपीठ ने उक्त तल्ख टिप्पणी की।
युगलपीठ ने निलंबन आदेश पेश करने के लिए समय प्रदान करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई सोमवार 22 अगस्त को निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा तथा सरकार की तरफ से उप महाधिवक्ता भरत सिंह उपस्थित हुए।