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Jabalpur News: दो बार मिली मृत्युदंड की सजा, तीसरी बार सुनवाई के लिए फिर जिला कोर्ट पहुंचा मामला

Thu, 21 Sep 2023 07:03 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर/खंडवा

सार

हाईकोर्ट ने जिला व सत्र न्यायालय के फैसले को सही करार देते हुए मृत्युदंड की सजा पर सहमत्ति प्रदान की थी, जिसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय की शरण ली गई थी।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : Social Media
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विस्तार
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खंडवा जिला व सत्र न्यायालय ने नौ साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या के मामले में दो बार सुनवाई करते हुए आरोपी को मृत्युदंड की सजा दंडित किया है। दूसरी बार दी गई मृत्युदंड की पृष्टि के लिए प्रकरण को हाईकोर्ट भेजा गया था। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने जिला न्यायालय को प्रकरण की दोबारा सुनवाई करते आदेश जारी किए हैं।

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उल्लेखनीय है कि खंडवा जिला न्यायालय ने चार मार्च 2013 को नौ साल की मासूम बच्ची के साथ दुराचार कर उसकी हत्या के आरोप में अनोखी लाल को मृत्युदंड की सजा से दंडित किया था। मृत्युदंड की पुष्टि के लिए प्रकरण को हाईकोर्ट भेजा गया था। हाईकोर्ट ने जिला व सत्र न्यायालय के फैसले को सही करार देते हुए मृत्युदंड की सजा पर सहमत्ति प्रदान की थी, जिसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय की शरण ली गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने जिला न्यायालय को निर्देशित किया था कि विशेष न्यायालय द्वारा प्रकरण की दोबारा सुनवाई की जाए। प्रकरण में सभी गवाहों का परीक्षण किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार विशेष न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए अगस्त 2022 में आरोपी को मृत्युदंड की सजा से दंडित किया था। सजा की पुष्टि के लिए प्रकरण को हाईकोर्ट रिफर किया था। आरोपी की तरफ से भी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। दोनों याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से डीएनए तथा एफएसएल रिपोर्ट संबंधित दस्तावेज तथा रिपोर्ट देने वाले डॉक्टर का परीक्षण की अनुमति प्रदान करने का आवेदन दायर किया गया था।
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आवेदन की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि विशेष न्यायालय ने डीएनए रिपोर्ट जारी करने वाले डॉक्टर को गवाही के लिए उपस्थित होने समन जारी किए थे, जिसे बाद में न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया था। युगलपीठ ने पूर्व में पारित आदेश का हवाला देते हुए मृत्युदंड की सजा को निरस्त करते हुए डीएनए डाक्टर को गवाही के लिए बुलाने के निर्देश दिए हैं। युगलपीठ ने इसके लिए तीन महीने की समय अवधि निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की तरफ से यज्ञावल्क शुक्ला ने पैरवी की।

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