आर्म्स एक्ट में कोर्ट ने अभियुक्त को सजा से दंडित करते हुए उसके प्रथमदृष्टया साक्ष्य छुपाने के दोषी पाया था। कोर्ट ने पुलिस को अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अभियुक्त ने खुद न्यायालिन आदेश के परिपालन कर कार्रवाई के लिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा था। पुलिस को न्यायालिन आदेश के परिपालन में चार साल से अधिक का समय लगा।
गौरतलब है कि आदर्श नगर निवासी अजीत सिंह आनंद उर्फ मंगे सरदार साल 2013 में अपनी बाइक में लोहे की चैन से तलवार बांधकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा था। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने उसके खिलाफ 25 आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था। प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोष मुक्त कर दिया था। जिसके खिलाफ प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रकरण में फिर से सुनवाई के निर्देश दिए थे।
सीजेएम राजकुमार यादव ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए अभियुक्त को अक्टूबर 2018 में दो साल की सजा से दंडित किया था। न्यायालय ने अभियुक्त को प्रथमदृष्टया अभियुक्त को साक्ष्य छुपाने को दोषी पाते हुए कार्रवाई के लिए सिविल लाइन पुलिस को निर्देशित किया था। कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई के लिए अभियुक्त ने साल 2019 में पुलिस महानिरीक्षक तथा पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा था। न्यायालीन आदेश पर कार्रवाई करने में पुलिस को चार साल से अधिक का समय लगा। सिविल ने आरोपी के खिलाफ धारा 406 तथा 201 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।