मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने कलेक्टर रीवा को निर्देशित किया है कि वे करहिया तालाब की जमीन की खरीद-बिक्री किए जाने की जांच करें। जांच में तालाब शासकीय पाया जाए तो सरकार के नाम दर्ज करें। एकलपीठ ने जांच के लिए एक साल का समय निर्धारित किया है।
याचिकाकर्ता रीवा निवासी मोहम्मद शाहिद अंसारी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि सुनील सिंह ने अपने-अपनी पत्नी मीता सिंह और अपनी साईं एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी के नाम शासकीय सार्वजनिक तालाब करहिया रीवा को दर्ज करा लिया है। इसके खिलाफ उसने साल 2011 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिला कलेक्टर द्वारा हाईकोर्ट में जांच प्रारंभ करने की जानकारी पेश करने पर हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया था। सिंह परिवार ने जांच के दौरान जिला कलेक्टर के समक्ष एक आपत्ति पेश की थी। इसमें कहा गया था कि जिला कलेक्टर को जांच का अधिकार नहीं है। जिला कलेक्टर द्वारा आपत्ति को खारिज किए जाने के कारण सिंह परिवार ने राजस्व मंडल की शरण ली थी। राजस्व मंडल ने जिला कलेक्टर की जांच पर रोक लगाते हुए अपने आदेश में कहा था कि कलेक्टर को जांच का अधिकार है।
जांच पर रोक लगाए जाने के कारण याचिकाकर्ता की तरफ से पुनः हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान जिला कलेक्टर ने नया प्रकरण दर्ज करते हुए सिंह परिवार को नोटिस जारी किए थे। सिंह परिवार के आवेदन पर राजस्व मंडल ने जिला कलेक्टर की जांच पर पुनः रोक लगा दी थी। इसके कारण उक्त याचिका दायर की गई थी। युगलपीठ ने दायर दोनों याचिकाओं की सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता शीतला त्रिपाठी तथा सुशील त्रिपाठी ने पैरवी की।