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Jabalpur News: पति नहीं माता-पिता के साथ रहना है... हाईकोर्ट ने किया बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण

Wed, 05 Aug 2026 11:16 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

पत्नी के अपहरण और बंधक बनाए जाने के आरोप में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान महिला ने हाईकोर्ट में कहा कि वह अपनी इच्छा से माता-पिता के साथ रहना चाहती है। इसके बाद अदालत ने याचिका समाप्त करते हुए पति को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत कानूनी विकल्प अपनाने की छूट दी।

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विस्तार
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मायके पक्ष पर पत्नी का अपहरण कर उसे बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाते हुए पति ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ के समक्ष मैहर पुलिस ने पूर्व आदेश के पालन में महिला को पेश किया। महिला ने अदालत को बताया कि वह अपनी इच्छा से अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है। इसके बाद युगलपीठ ने उसके बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।

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मैहर जिले के उदयपुर निवासी रोहित कुमार चौधरी द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि मई माह में प्रेम विवाह करने के कारण पत्नी का मायका पक्ष उनसे नाराज था। आरोप लगाया गया कि मायके पक्ष के लोग पुलिस की मदद से उन्हें और उनके परिजनों को प्रताड़ित कर रहे थे, जिसमें दो पुलिसकर्मियों की भी अहम भूमिका थी। प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। उस समय हाईकोर्ट ने दोनों को बालिग मानते हुए आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा उपलब्ध कराने के संबंध में पुलिस और जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे।

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याचिका के अनुसार, मायके पक्ष की नाराजगी के चलते वह अपनी पत्नी और भाई के साथ दिल्ली में रहने लगे थे। आरोप है कि 26 जुलाई को मायके पक्ष के लोग दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने याचिकाकर्ता और उसके भाई के साथ मारपीट की तथा पत्नी को जबरन अपने साथ ले गए। इस संबंध में दिल्ली के संबंधित थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई। याचिकाकर्ता का यह भी दावा था कि बाद में पत्नी ने फोन कर बताया कि मायके पक्ष के लोग उसे कमरे में बंद रखे हुए हैं और किसी से मिलने नहीं देते। किसी तरह अवसर मिलने पर उसने फोन किया। इस पर हाईकोर्ट ने महिला को न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए थे।
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बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान महिला ने अदालत में स्पष्ट कहा कि वह अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती और अपनी इच्छा से माता-पिता के साथ रहना चाहती है। महिला का बयान दर्ज करने के बाद युगलपीठ ने उसे अपनी इच्छा के अनुसार माता-पिता के साथ जाने की अनुमति दे दी। साथ ही याचिकाकर्ता को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता भी प्रदान की। 

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