गोकलपुर निवासी अर्चना काछी द्वारा अपने देवर पर गंभीर आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। महिला ने दावा किया था कि उसका देवर मनोज काछी उसके पति अरविंद काछी के नाम और शैक्षिक दस्तावेजों का दुरुपयोग कर भारतीय सेना में नौकरी कर रहा है।
याचिका में यह भी कहा गया कि महिला का पति पिछले दस महीनों से लापता है और थाने में शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस ने पति की बजाय देवर की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली।
हाईकोर्ट में पहले हुई सुनवाई के दौरान भारतीय सेना में कार्यरत अरविंद काछी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कहा कि वह महिला का पति नहीं है। मंगलवार को हुई सुनवाई में वह दोबारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुआ। महिला ने अदालत से अपनी याचिका वापस लेने का आग्रह किया, जिसे जस्टिस एस.के. धर्माधिकारी और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने स्वीकार कर लिया और याचिका को निराकृत कर दिया।