प्रदेश सरकार द्वारा 53 प्रजातियों के वृक्षों की कटाई एवं परिवहन पर अनुमति की आवश्यकता को समाप्त करने के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी। स्थगन आदेश के खिलाफ कुछ व्यक्तियों द्वारा हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिस पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की युगलपीठ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ ने याचिकाकर्ताओं और अनावेदकों को हस्तक्षेप आवेदन पर उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 2 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
याचिका में जबलपुर निवासी विवेक कुमार शर्मा एवं एक अन्य की ओर से कहा गया कि 2015 की सरकारी अधिसूचना से 53 वृक्ष प्रजातियों की कटाई एवं परिवहन के लिए अनुमति की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। इसका परिणाम यह हुआ कि निजी भूमि पर स्थित वृक्षों की कटाई बढ़ रही है, जो सर्वोच्च न्यायालय के टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुल्कपाद बनाम भारत संघ मामले में जारी आदेश के विपरीत है। वृक्षों की कटाई से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद रोक को बरकरार रखते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील अंशुमान सिंह की पैरवी में हस्तक्षेप आवेदन पर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।